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बर्नपुर सेल में बीएमएस की बड़ी जीत, 2,189 वोटों के साथ बनी सबसे बड़ी यूनियन

Moutushi · 25 September 2026, 12:32 PM

बर्नपुर: सेल के इस्को स्टील प्लांट (आईएसपी), बर्नपुर में ट्रेड यूनियन सदस्यता सत्यापन के लिए 24 सितंबर 2026 को हुए गुप्त मतदान का परिणाम सामने आते ही औद्योगिक क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। चुनाव में भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ ने सबसे अधिक वोट हासिल किए हैं। जारी परिणाम के अनुसार बीएमएस समर्थित यूनियन को कुल 2,189 वोट मिले। इस परिणाम के साथ बर्नपुर आईएसपी में यूनियन प्रतिनिधित्व का नया समीकरण सामने आया है।

चुनाव में कुल 3,514 कर्मचारी मतदाता थे, जिनमें से 3,291 कर्मचारियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यानी मतदान का प्रतिशत करीब 93.65 प्रतिशत रहा। चुनाव में अलग-अलग श्रमिक संगठनों के बीच मुकाबला हुआ और मतगणना के बाद बीएमएस सबसे आगे रहा। उपलब्ध परिणाम के मुताबिक 2,189 वोट बीएमएस, 781 वोट आईएनटीयूसी, 215 वोट सीटू, 33 वोट एआईएनटीयूसी, 31 वोट एचएमएस, 17 वोट एआईयूटीयूसी और 17 वोट आईएमयू को मिले। वहीं 8 मत अमान्य घोषित किए गए।

बीएमएस को मिले 2,189 वोट, दूसरे स्थान से बड़ा अंतर

परिणाम का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा बीएमएस के पक्ष में पड़े 2,189 वोट हैं। दूसरे स्थान पर रही आईएनटीयूसी को 781 वोट मिले। इस तरह दोनों यूनियनों के बीच 1,408 वोटों का अंतर रहा। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बीएमएस को वैध मतों का लगभग 66.68 प्रतिशत समर्थन मिला। कुल मतदाताओं के आधार पर भी बीएमएस का वोट प्रतिशत 60 प्रतिशत से अधिक रहा।

मतदान में कर्मचारियों की भारी भागीदारी भी इस चुनाव की खास बात रही। 3,514 मतदाताओं में से 3,291 कर्मचारियों का मतदान करना बताता है कि यूनियन प्रतिनिधित्व को लेकर कर्मचारियों की भागीदारी काफी अधिक रही। सात मतदान केंद्रों पर मतदान की व्यवस्था किए जाने की जानकारी चुनाव से पहले सामने आई थी।

पहली बार चुनावी प्रक्रिया से तय हुआ यूनियन प्रतिनिधित्व

आईएसपी बर्नपुर में हुए इस चुनाव को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यूनियन मान्यता को लेकर लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। अगस्त 2026 में प्रबंधन और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद 24 सितंबर को गुप्त मतदान कराने का कार्यक्रम तय किया गया था। उस समय चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराने पर सभी पक्षों की सहमति की बात सामने आई थी।

चुनाव से पहले कर्मचारियों को अपनी पसंद की यूनियन चुनने का अवसर देने को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से प्रचार अभियान भी चलाया गया था। चुनाव के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए थे। अब परिणाम आने के बाद आईएसपी में श्रमिक प्रतिनिधित्व को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

लंबे समय से चल रही यूनियन मान्यता की प्रक्रिया

आईएसपी में यूनियन मान्यता का मुद्दा पहले भी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में रहा है। 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष भी आईएसपी की ट्रेड यूनियनों की सदस्यता और मान्यता से संबंधित प्रक्रिया का मामला सामने आया था। अदालत के आदेश में यूनियनों की सदस्यता सत्यापन और मान्यता के लिए चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने से संबंधित घटनाक्रम का उल्लेख किया गया था।

इसके बाद 2026 में चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और 24 सितंबर को कर्मचारियों ने गुप्त मतदान के माध्यम से विभिन्न यूनियनों के बीच अपना प्रतिनिधित्व तय किया। परिणाम में बीएमएस समर्थित बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ सबसे अधिक वोट हासिल करने वाला संगठन बनकर सामने आया है।

आधुनिकीकरण के दौर में आया चुनाव परिणाम

बर्नपुर आईएसपी इस समय विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड ने आईएसपी की कच्चे इस्पात की क्षमता को बढ़ाने के लिए 4.08 मिलियन टन वार्षिक क्षमता विस्तार को मंजूरी दी है। इस विस्तार से संबंधित तकनीकी पैकेजों में से अधिकांश के ठेके दिए जा चुके हैं।

पर्यावरण मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार आईएसपी में कच्चे इस्पात की क्षमता को 2.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 7.1 मिलियन टन प्रति वर्ष करने से संबंधित प्रस्ताव भी दर्ज है। वहीं 2026 में आईएसपी की 4.08 मिलियन टन विस्तार परियोजना से जुड़े 673.32 करोड़ रुपये के एक बड़े कार्यादेश की भी जानकारी सामने आई थी।

ऐसे समय में यूनियन मान्यता का यह चुनाव कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच भविष्य के औद्योगिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वेतन, सेवा शर्तें, कार्यस्थल की सुरक्षा, कल्याणकारी सुविधाएं, ठेका श्रमिकों से जुड़े मुद्दे और औद्योगिक विकास जैसे विषयों पर आने वाले समय में यूनियन की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

अब कर्मचारियों की नजर आगे की भूमिका पर

चुनाव परिणाम के बाद बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की होगी। वहीं अन्य यूनियनों के लिए भी यह परिणाम अपने संगठनात्मक आधार और कर्मचारियों के बीच भविष्य की रणनीति पर विचार करने का अवसर है।

बर्नपुर के औद्योगिक इतिहास में आईएसपी की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में 24 सितंबर का यह चुनाव केवल वोटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में श्रमिक प्रतिनिधित्व और यूनियन गतिविधियों की दिशा पर भी इसका असर देखा जा सकता है। फिलहाल 2,189 वोटों के साथ बीएमएस समर्थित बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ चुनाव में सबसे बड़े समर्थन के साथ उभरा है, जबकि आईएनटीयूसी 781 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

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