कोलकाता।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ‘दुआरे जगन्नाथ’ योजना के तहत दीघा जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद वितरण किए जाने पर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्यक्रम को जनता के टैक्स की बर्बादी करार दिया है।
भाजपा के राज्य सदस्य कृष्णेन्दु मुखर्जी ने इस योजना पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा,
“सरकार जनता के टैक्स का पैसा धार्मिक प्रचार में खर्च कर रही है। जिलाधिकारियों को प्रसाद बांटने में लगाया जा रहा है, जबकि उनके कंधों पर विकास और प्रशासनिक जिम्मेदारियां हैं।”
📌 42 करोड़ खर्च पर बवाल
मुखर्जी ने दावा किया कि इस प्रसाद वितरण अभियान पर सरकार करीब 42 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसे “राजकोष का दुरुपयोग” कहा जा सकता है। उन्होंने पूछा कि —
“क्या यही पैसा राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य या कृषि क्षेत्र में नहीं लगाया जा सकता था?”
📉 प्रशासनिक फोकस पर उठे सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को अब धार्मिक आयोजनों में ‘इवेंट मैनेजमेंट कंपनी’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
“डीएम जैसे वरिष्ठ अधिकारी अगर प्रसाद वितरण करेंगे, तो विकास योजनाओं की निगरानी कौन करेगा?” — मुखर्जी
🔥 विपक्ष का वार बनाम सरकार की चुप्पी
हालांकि राज्य सरकार की तरफ से इस आरोप पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकार मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। विशेषकर 2026 के चुनावों से पहले भाजपा इस मुद्दे को ‘तुष्टिकरण बनाम सेवा’ के नैरेटिव में तब्दील कर सकती है।










