भवानीपुर में 47 हजार नाम कटे, बदलेंगे क्या चुनावी समीकरण?

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दक्षिण कोलकाता की प्रतिष्ठित भवानीपुर विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। वर्ष 2021 के उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां लगभग 58 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में अब 47 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटना और 14 हजार से ज्यादा नामों का भविष्य अधर में लटकना चुनावी समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

📊 दक्षिण कोलकाता की अन्य सीटें भी प्रभावित

भवानीपुर के अलावा कोलकाता पोर्ट, रासबिहारी और बालीगंज जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में भी हजारों मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में हैं। दक्षिण कोलकाता के कुल 1,093 बूथों के आंकड़ों के विश्लेषण में करीब 78,657 मतदाताओं की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नामों का हटना या ‘विचाराधीन’ रहना आगामी चुनाव में सीधा असर डाल सकता है।

🏛️ निर्वाचन अधिकारी का बयान

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में सभी ‘विचाराधीन’ मामलों का निपटारा किया जाएगा, ताकि किसी भी वैध मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।

⚔️ आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने इसे मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने की सामान्य प्रक्रिया बताया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस बदलाव के बाद ममता बनर्जी को भवानीपुर से चुनाव लड़ने में कठिनाई हो सकती है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया आयोग और भाजपा की मिलीभगत से हो रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम हटने नहीं दिया जाएगा। जिन मतदाताओं के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए हैं, उनके लिए पुनः आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

🔎 2026 से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और निष्पक्ष रहती है, और राजनीतिक दल इसे अपने-अपने पक्ष में किस तरह भुनाते हैं। फिलहाल भवानीपुर और दक्षिण कोलकाता की सीटों पर चुनावी गणित पूरी तरह से नए सिरे से लिखा जाता दिखाई दे रहा है।

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