बराकर (आसनसोल): पश्चिम बर्धमान जिले के बराकर शहर के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बराकर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (रानी बांग्ला अस्पताल) में अब जल्द ही एक नया और आधुनिक भवन बनने जा रहा है। इस भवन के निर्माण पर करीब 5 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। शुक्रवार को आसनसोल जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल परिसर में नारियल फोड़कर इस नए भवन के निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास किया।
इस ऐतिहासिक पहल से बराकर और कुल्टी क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे थे।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला युवा कांग्रेस के नेता रवि यादव ने बताया कि बराकर के हॉस्पिटल रोड स्थित रानी बांग्ला अस्पताल में सुविधाओं की कमी को लेकर कांग्रेस ने कई बार आंदोलन किया था। आखिरकार जनता के धैर्य, संघर्ष और एकजुटता का परिणाम सामने आया है।
रवि यादव ने कहा कि वर्ष 2024 में दो बार बराकर बस स्टैंड के पास भूख हड़ताल की गई थी। इसके अलावा जुलाई 2025 में जिला शासक कार्यालय के पास अनशन, सड़क जाम और सीएमओ कार्यालय का घेराव भी किया गया था। इन आंदोलनों के बाद प्रशासन को इस मांग पर गंभीरता से विचार करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि आखिरकार जिले के सीएमओ स्वयं अस्पताल परिसर पहुंचे और लगभग 5 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नए भवन का शिलान्यास किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि करीब एक वर्ष के भीतर इस भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
नए भवन के निर्माण के बाद बराकर और कुल्टी क्षेत्र के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। यहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण, बेहतर उपचार व्यवस्था और मरीजों के लिए अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस मौके पर रवि यादव ने सीएमओ को फूलों का गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया और कहा कि यह सफलता यहां के लोगों की एकजुटता और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह नया भवन बनने के बाद बराकर क्षेत्र के हजारों परिवारों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी और स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि लंबे समय से जिस अस्पताल के विस्तार की मांग की जा रही थी, वह अब पूरी होती दिख रही है। इससे आसपास के कई इलाकों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा और उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।














