बराकर में गणगौर महोत्सव का भव्य समापन, नदी तट पर हुआ मूर्ति विसर्जन

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बराकर : पश्चिम बंगाल के बराकर क्षेत्र में राजस्थानी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला 16 दिवसीय पारंपरिक गणगौर महोत्सव शनिवार को बराकर नदी तट पर मूर्ति विसर्जन के साथ भव्य रूप से संपन्न हो गया। इस दौरान महिलाओं की भारी भीड़ और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं, नवविवाहिताओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा सामूहिक रूप से मनाया जाता है। होलिका दहन के साथ शुरू होने वाला यह त्योहार पूरे 16 दिनों तक घर-घर में उत्साह, भक्ति और उल्लास का वातावरण बनाए रखता है।

🌸 मां गौरा और भगवान ईशर की आराधना

गणगौर में मां गौरी (गणगौर) और भगवान शिव (ईशर) की पूजा की जाती है। इन 16 दिनों के दौरान महिलाएं हरी दूब और कुएं के जल से गौरा-ईशर की विधिवत पूजा करती हैं।

पूजा में बाजरे के आटे की पंजिरी, चना और गेहूं की घुघरी का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में परिवार और सहेलियों के बीच वितरित किया जाता है।

🙏 सुखी वैवाहिक जीवन और योग्य वर की कामना

इस दौरान नवविवाहित महिलाएं अपने अखंड सुहाग और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना करती हैं।

पूरे 16 दिनों तक घरों में चहल-पहल रहती है, शाम को गणगौर की कथा सुनाई जाती है और राजस्थानी लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

🎶 लोकगीत और पकवानों से सजी परंपरा

पूजा के दौरान घरों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और महिलाओं द्वारा लोकगीत गाए जाते हैं, जिससे पूरे माहौल में सांस्कृतिक रंग भर जाता है।

🌊 नदी तट पर हुआ भव्य विसर्जन

शनिवार को बराकर नदी तट पर विधि-विधान के साथ गणगौर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने उपवास रखकर पूजा-अर्चना की और गणगौर की कथा सुनने के बाद प्रसाद ग्रहण किया।

💫 विदाई के साथ भावुक पल

गणगौर की विदाई के साथ ही माहौल भावुक हो गया। परंपरा के अनुसार, गणगौर के विसर्जन के एक-दो दिन बाद नवविवाहिताओं की भी विदाई होती है, जो इस पर्व को और अधिक भावनात्मक बना देता है।

📌 निष्कर्ष:

बराकर में गणगौर महोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और महिलाओं की आस्था का जीवंत प्रतीक है।
👉 16 दिनों तक चले इस उत्सव ने एक बार फिर समाज में संस्कृति, श्रद्धा और एकता की मिसाल पेश की।

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