आसनसोल | 11 अप्रैल 2025: पश्चिम बर्धमान ज़िले के स्वास्थ्य विभाग के सामने शुक्रवार को आशा कर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा। वर्षों से उपेक्षा और अस्थिरता झेल रहीं इन स्वास्थ्य सेविकाओं ने अपने हक और सम्मान की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरने का फैसला लिया।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहीं यूनियन नेता केक पाल ने जोर देकर कहा —
“हम हर घर तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाते हैं, लेकिन खुद के लिए कोई सुविधा नहीं है। अब और चुप नहीं बैठेंगे।”
💥 आशा बहनों की प्रमुख माँगें:
- ₹15,000 मासिक वेतन का निर्धारण
- प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) में वृद्धि
- स्थायी कर्मचारी का दर्जा और भविष्य निधि योजना
- मातृत्व अवकाश की न्यूनतम सीमा 6 महीने
- मेडिकल सुविधाएं, रिटायरमेंट पर ₹5 लाख की हेल्थ सहायता
- उचित संख्या में वार्षिक छुट्टियाँ और मानवता भरा रवैया
👩⚕️ “नवजात को दूध तक नहीं पिला पातीं” — दर्द से भरी माँओं की पुकार
केक पाल ने कहा:
“10 दिन की छुट्टी में क्या कोई माँ अपने बच्चे को ठीक से संभाल सकती है? हमारे साथ यह अन्याय नहीं चलेगा।”
🛑 नबन्नो चलो आंदोलन की चेतावनी!
आशा कर्मियों ने प्रशासन को 22 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि उनकी माँगों पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे राज्य सचिवालय नबन्नो का घेराव करेंगी।










