आसनसोल: गुरुवार को सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (SUCI) के बैनर तले ‘कानून तोड़ो आंदोलन’ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीओ कार्यालय का घेराव कर सरकार की नीतियों के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की और मांगों का ज्ञापन सौंपा।
SUCI नेताओं का आरोप है कि शिक्षा, रोजगार और न्याय से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकारें चुप हैं, जबकि आम जनता लगातार संघर्ष कर रही है।
🔥 प्रदर्शन के तीन बड़े मुद्दे 🔥
📚 शिक्षा में निजीकरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद
SUCI के नेता बबला भट्टाचार्य ने कहा,
🗣️ “शिक्षा अब अधिकार नहीं, बल्कि कारोबार बन गई है। सरकारों की नीतियां निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे गरीबों के लिए पढ़ाई नामुमकिन होती जा रही है।”
उन्होंने मांग की कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएं, फीस में कटौती हो और शिक्षा को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में लाया जाए।

⚖️ आर. जिकर कांड में न्याय की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीबीआई, केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं, लेकिन पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है।
🗣️ “हम इंसाफ मांग रहे हैं, लेकिन सरकारें सिर्फ राजनीति कर रही हैं। अब यह बर्दाश्त नहीं होगा!”
👨💼 सरकारी नौकरियों की कमी और बेरोजगारी पर गुस्सा
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारें स्थायी रोजगार खत्म कर रही हैं और निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे युवा पीढ़ी बेरोजगार होती जा रही है।
🗣️ “पढ़ाई के बाद भी नौकरी नहीं, तो युवा जाएं कहां?”
उन्होंने सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की संख्या बढ़ाने और संविदा व्यवस्था खत्म करने की मांग की।
📜 SDO को सौंपा ज्ञापन, चेतावनी दी
प्रदर्शनकारियों ने आसनसोल SDO कार्यालय को एक ज्ञापन सौंपा और सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज होगा।
🗣️ “हम सड़कों पर उतर चुके हैं, अगर सरकार नहीं सुनेगी तो जनता के हक के लिए और बड़ा आंदोलन करेंगे!”










