आसनसोल:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चर्चित नारा— “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा”— एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आसनसोल रेल मंडल से जुड़ा एक मामला अब इसी नारे के उलट तस्वीर पेश करता नजर आ रहा है। मात्र छह महीने तक आसनसोल की मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रहीं श्रीमती विनीता श्रीवास्तव को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है।
जमुई के तेलवा बाजार में हुए रेल हादसे के बाद उन्हें “बलि का बकरा” बनाए जाने की साजिश रची गई—ऐसा आरोप है। कहा जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में पूर्व रेलवे के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है।
हादसे के बाद सराहना, फिर अचानक तबादला
रेल हादसे के तुरंत बाद DRM विनीता श्रीवास्तव द्वारा दिखाई गई तेज कार्रवाई, कुशल साइट मैनेजमेंट और लगातार मौजूदगी की रेल अधिकारियों के एक वर्ग ने खुले तौर पर प्रशंसा की थी। इसके बावजूद, यातायात बहाली में कथित देरी का हवाला देकर उनका अचानक स्थानांतरण कर दिया गया, जिसने पूरे मामले को विवादों में ला खड़ा किया।
इस फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे ईमानदार अधिकारी को दबाने की कोशिश बता रहे हैं।
CAT में चुनौती, ट्रिब्यूनल का बड़ा आदेश
DRM विनीता श्रीवास्तव ने अपने स्थानांतरण आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), कोलकाता में चुनौती दी है। उन्होंने अब तक नए DRM के रूप में नियुक्त सुधीर कुमार शर्मा को पदभार नहीं सौंपा है।

उनके वकील का कहना है कि—
- बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के उन्हें वेस्ट सेंट्रल रेलवे भेजा गया
- उन्हें ट्रांसफर ऑर्डर की प्रति तक नहीं दी गई
- स्थानांतरण की जानकारी अनौपचारिक रूप से दी गई
CAT में हुई सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने रेलवे से सवाल किया कि एक ही दिन में तबादला और चार्ज सौंपने का क्या औचित्य था। रेलवे के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।
ट्रिब्यूनल ने 08 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई तय करते हुए तब तक यथास्थिति बनाए रखने और DRM के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
देरी के आरोप पर उठे सवाल, नियम कुछ और कहते हैं
रेलवे की ओर से दावा किया गया कि 30 दिसंबर 2025 को रात 8 बजे प्रस्तुत 2.22 करोड़ रुपये के कैश इम्प्रेस्ट प्रस्ताव को DRM द्वारा अनुमोदन न देने के कारण बहाली में देरी हुई।
लेकिन MSOP Part-C, Para 10(E) के अनुसार—
- दुर्घटना के समय बहाली से जुड़े खर्च की पूरी शक्ति JAG/SG अधिकारियों के पास होती है
- DRM की स्वीकृति आवश्यक नहीं होती
- रोड क्रेन और अन्य उपकरणों की हायरिंग के लिए पहले से स्वतंत्र अधिकार मौजूद हैं
DRM के पक्ष में सामने आए अहम तथ्य
- DRM विनीता श्रीवास्तव 28 दिसंबर 2025 को रात 00:14 बजे दुर्घटनास्थल पर पहुंचीं
- करीब 75 घंटे लगातार मौके पर रहकर बहाली कार्य की निगरानी की
- डाउन मेन लाइन 30 दिसंबर को 00:10 बजे फिट घोषित हो चुकी थी
- इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने 19 घंटे से अधिक समय तक सिंगल लाइन वर्किंग की अनुमति नहीं दी
- वास्तविक देरी का कारण रोड क्रेन और काउंटरवेट की देर से उपलब्धता रहा
इन तथ्यों के आधार पर DRM को जिम्मेदार ठहराना MSOP नियमों के अनुरूप नहीं माना जा रहा है।
RLDA को जमीन ट्रांसफर बना नया मोड़
मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है।
अक्टूबर 2025 में DRM विनीता श्रीवास्तव ने आसनसोल मंडल की एक कीमती रेलवे जमीन को RLDA को सौंपे जाने को लेकर पूर्व रेलवे मुख्यालय, कोलकाता को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।
कुछ अधिकारियों का दावा है कि इस जमीन ट्रांसफर में भूमि माफियाओं का दबाव था, जिसे DRM ने सवालों के घेरे में लाया। माना जा रहा है कि यही ईमानदारी उनके लिए मुसीबत बन गई।
प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का आरोप
DRM का स्थानांतरण—
- बिना सुनवाई का अवसर दिए
- अधूरे तथ्यों के आधार पर
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ
किया गया—ऐसा आरोप लगाया गया है। CAT में पेश किए गए छह पन्नों के दस्तावेज भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि, Bengal Mirror इन दस्तावेजों की पुष्टि नहीं करता।
अब सबकी नजरें 8 जनवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि रेलवे प्रशासन अपने फैसले को कैसे सही ठहराता है। फिलहाल रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।











