आसनसोल | 11 अप्रैल 2025: बंगाली नववर्ष यानी ‘पहला वैशाख’ के मौके पर आसनसोल बाजार में रौनक तो दिखी, लेकिन एक बात ने सभी का ध्यान खींचा—परंपरागत बही-खाता खरीदने वालों की संख्या में कमी।
पहले जहां व्यापारी बही-खाते के बिना नया साल शुरू ही नहीं करते थे, वहीं अब डिजिटल अकाउंटिंग ने पुरानी परंपराओं को धीरे-धीरे पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है।
📉 डिजिटल युग ने बदली परंपराएं
बाजार में दुकानदारों ने बताया कि अब व्यापारी बही-खाता सिर्फ ‘पूजन और परंपरा’ के लिए खरीदते हैं, न कि रोज़मर्रा के हिसाब-किताब के लिए। मोबाइल ऐप्स और कंप्यूटर ने परंपरागत लेखा-जोखा की जगह ले ली है।
एक स्टेशनरी दुकानदार ने बताया, “पांच साल पहले पहले वैशाख से पहले बही-खातों की लंबी कतार लगती थी, अब लोग फोटो खिंचवाकर पूजा करते हैं और अकाउंटिंग मोबाइल में करते हैं।”
🙏 धार्मिक आस्था बनी रही बरकरार
हालांकि तकनीक ने जगह बना ली है, पर पहला वैशाख का आध्यात्मिक महत्व अभी भी जीवित है। व्यापारियों ने नए बही-खाते की पूजा की, ग्राहकों को मिठाई बांटी और ‘शुभ लाभ’ लिखकर शुरुआत की।
🛍️ बाजार में क्या-क्या रहा खास?
- मिठाई दुकानों पर भीड़
- परंपरागत लाल कपड़े और पूजा सामग्री की खरीद
- मोबाइल पर ‘शुभ नववर्ष’ स्टिकर और डिजिटल कार्ड का ट्रेंड










