आसनसोल | 22 मई, 2025
सतिप्रथा जैसे क्रूर सामाजिक कुरीति को समाप्त करने वाले समाज सुधारक राजा राममोहन राय की जन्मजयंती के अवसर पर आसनसोल नगर निगम ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, पार्षदगण और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।
🗣️ राजा राममोहन का संघर्ष आज भी प्रेरणा है — अमरनाथ चटर्जी
चेयरमैन ने इस अवसर पर कहा:
“राजा राममोहन राय बचपन में ही घर छोड़कर पटना, बनारस और तिब्बत जाकर अध्ययन करते हुए अनेक विषयों में निपुण बने। समाज की कुरीतियों को समझने के बाद, उन्होंने अपने मित्र विलियम कैरी के साथ मिलकर सतिप्रथा के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। रवींद्रनाथ टैगोर, द्वारकानाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्व भी इस मुहिम से जुड़े। अंततः लॉर्ड बेंटिक के गवर्नर बनने पर सतिप्रथा को कानूनी रूप से समाप्त किया गया।”
💔 दादी के सती होने से शुरू हुआ संघर्ष
सूत्रों के अनुसार, राजा राममोहन राय के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनके परिवार में एक महिला को सतिप्रथा की बलि चढ़ना पड़ा। उसी पीड़ा ने उन्हें समाज बदलने की राह पर ला खड़ा किया।
🎓 विद्यालयों में आयोजित विशेष कार्यक्रम
इस दिन आसनसोल के कई स्कूलों में विशेष कक्षाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को राजा राममोहन राय के विचारों से परिचित कराया गया।
🕯️ राजा राममोहन के विचारों की आज भी है आवश्यकता
समाजसेवियों और शिक्षाविदों ने कहा कि आज के समय में भी राजा राममोहन जैसे व्यक्तित्व की सोच और संघर्ष को अपनाना बेहद ज़रूरी है, ताकि समाज में व्याप्त नई कुरीतियों से भी निपटा जा सके।










