कोलकाता/आसनसोल:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यदि किसी नेता को “संकटमोचक” कहा जाता है, तो वह नाम है — मलय घटक। खासकर पश्चिम बर्धमान और आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में पार्टी के भीतर मतभेद हों या सांगठनिक चुनौती, तृणमूल कांग्रेस के लिए मलय घटक की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। उनकी सादगी, कानूनी समझ और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उन्हें क्षेत्र का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय नेता बनाता है।
🗳️ आसनसोल उत्तर: वाम किले से तृणमूल का गढ़
कभी वामदलों का मजबूत किला रही आसनसोल विधानसभा सीट आज तृणमूल कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती है। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 1951 से 2006 तक इस क्षेत्र पर वामदलों का दबदबा रहा। इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने 14 में से 9 बार जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने 4 बार बाज़ी मारी।

हालांकि 2011 में परिसीमन के बाद आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया और तभी से यहां तृणमूल कांग्रेस का परचम लहरा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में रहे मलय घटक।
🔁 लगातार तीन जीत, चौथी पर नजर
मलय घटक ने 2011 के विधानसभा चुनाव में माकपा उम्मीदवार रानू रायचौधरी को 47,793 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया।
2016 में उन्होंने भाजपा के निर्मल करमाकर को 23,897 वोटों से और 2021 में भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी को 21,110 वोटों से शिकस्त दी।
लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज कर चुके मलय घटक अब 2026 में चौथी बार जीत (चौका) लगाने की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
🧭 2001 से शुरू हुआ सियासी सफर
मलय घटक का राजनीतिक सफर 2001 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। 2006 में हार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2011 में ऐतिहासिक परिवर्तन के बाद शानदार वापसी की। तब से वे आसनसोल उत्तर सीट से लगातार विजयी होते आ रहे हैं।
⚖️ ममता सरकार के कानूनी स्तंभ
2011 में ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद से मलय घटक लगातार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। उन्होंने
- श्रम विभाग
- कृषि विपणन विभाग
- और वर्तमान में कानून एवं न्यायिक विभाग तथा श्रम विभाग
जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है।
पेशे से वकील (LL.B.) होने के कारण वे सरकार के कानूनी मामलों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में गिने जाते हैं।

👷 श्रमिकों के बीच गहरी पकड़
एक श्रम मंत्री के रूप में मलय घटक ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, औद्योगिक श्रमिकों और चाय बागान मजदूरों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारा। यही वजह है कि आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक बेल्ट में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।
🎓 शिक्षा और शुरुआती जीवन
आसनसोल में जन्मे मलय घटक ने विज्ञान में स्नातक (B.Sc.) की पढ़ाई के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून (LL.B.) की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वे आसनसोल कोर्ट के एक प्रतिष्ठित वकील थे। वकालत का यही अनुभव उन्हें एक सशक्त प्रशासक और रणनीतिकार बनाता है।
⚔️ 2026 में कैसी होगी चुनौती?
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की कम अंतर से हार के बाद पार्टी को क्षेत्र में नई उम्मीद जरूर मिली है। भाजपा की रणनीति हिंदी भाषी मतदाताओं और अनुसूचित जाति-जनजाति वोटों में सेंध लगाने पर टिकी है। वहीं, लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के संभावित गठबंधन से भी तृणमूल को चुनौती मिल सकती है।
लेकिन मौजूदा हालात में, संगठन पर मजबूत पकड़ और जनता के बीच भरोसे के कारण मलय घटक को हराना अब भी आसान नहीं माना जा रहा।











