आसनसोल: पश्चिम बर्दवान जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर अचानक सड़क धंसने की घटना सामने आने के बाद इलाके में हलचल मच गई। कोलकाता जाने वाले मार्ग पर एथोड़ा पुल के समीप शुक्रवार रात सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क धंसने के बाद वहां करीब 1 से 1.5 फीट गहरा गड्ढा बन गया। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक सड़क की सतह नीचे चले जाने से वाहन चालकों और आसपास के लोगों में चिंता का माहौल है।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित विभाग की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर धंसे हुए हिस्से को घेर दिया गया है। साथ ही इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो। फिलहाल वाहन सामान्य रूप से गुजर रहे हैं, लेकिन सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास सावधानी बरती जा रही है।
शुक्रवार रात अचानक हुआ सड़क धंसाव
राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एथोड़ा पुल के समीप यह घटना शुक्रवार रात की है। रात के समय सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। देखते ही देखते सड़क की सतह पर करीब 1 से 1.5 फीट गहरा गड्ढा बन गया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क धंसने की जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्तर पर इसकी निगरानी शुरू की गई।
एनएच-19 आसनसोल क्षेत्र से होकर गुजरने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क के बीच अचानक गड्ढा बनना वाहन चालकों के लिए परेशानी और संभावित जोखिम का कारण बन सकता है।
कोलकाता जाने वाले मार्ग पर धंसाव
बताया गया है कि सड़क का धंसा हुआ हिस्सा एनएच-19 के कोलकाता जाने वाले मार्ग पर एथोड़ा पुल के समीप स्थित है। यह मार्ग लगातार वाहनों की आवाजाही वाला हिस्सा है। सड़क की सतह पर अचानक बने गड्ढे के कारण वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
विशेष रूप से रात के समय सड़क पर रोशनी और वाहनों की गति के बीच अचानक सामने आने वाला गड्ढा परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को घेरकर वाहन चालकों को सावधान करने की व्यवस्था की गई है। फिलहाल वाहनों को प्रभावित हिस्से से सुरक्षित तरीके से निकालने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा के लिए धंसे हिस्से की घेराबंदी
घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर सड़क के धंसे हुए हिस्से को घेर दिया गया है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को सीधे गड्ढे के संपर्क में आने से रोकना और दुर्घटना की संभावना को कम करना है। साथ ही यातायात को सामान्य बनाए रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित न हो।
सड़क पर गड्ढा बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क की सतह में अचानक बदलाव परेशानी पैदा कर सकता है। बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान भी क्षतिग्रस्त हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका को देखते हुए इस स्थान पर निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वाहन चालकों में बढ़ी चिंता
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क धंसने की घटना के बाद वाहन चालकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि एनएच-19 जैसे व्यस्त मार्ग पर सड़क की सतह का अचानक धंसना सामान्य घटना नहीं है। यदि समय रहते ऐसे स्थानों की पहचान और मरम्मत नहीं की गई, तो भविष्य में परेशानी बढ़ सकती है।
वाहन चालकों ने संबंधित अधिकारियों से इस हिस्से पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक सड़क की पूरी तरह मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित हिस्से के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। खासकर रात के समय यहां अतिरिक्त सावधानी की जरूरत बताई जा रही है।
सड़क धंसने की वजह पर निगाह
फिलहाल सड़क किस वजह से धंसी, इसे लेकर कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। सड़क की सतह के नीचे की स्थिति, जल निकासी या अन्य तकनीकी कारणों की जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए फिलहाल किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना जल्दबाजी होगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग के इस हिस्से में सड़क के नीचे की संरचना की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धंसाव केवल सड़क की ऊपरी सतह तक सीमित है या नीचे के हिस्से में भी किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई है।
लगातार निगरानी की मांग
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क के धंसे हिस्से की सिर्फ अस्थायी घेराबंदी पर्याप्त नहीं होगी। उनकी मांग है कि संबंधित विभाग मौके की तकनीकी जांच कराकर जल्द से जल्द आवश्यक मरम्मत की कार्रवाई करे। साथ ही आसपास के हिस्से की भी जांच की जाए, ताकि सड़क पर कहीं और धंसाव की स्थिति हो तो उसका समय रहते पता लगाया जा सके।
फिलहाल एथोड़ा पुल के समीप एनएच-19 पर सड़क धंसने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है और वाहनों की आवाजाही जारी है। हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर बने 1 से 1.5 फीट गहरे गड्ढे ने सड़क की सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत कब तक पूरी होती है और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




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