“नील गाजन” में आस्था का सैलाब! चंद्रचूड़ मंदिर बना भक्ति का तीर्थ

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आसनसोल: एक ओर जहां गर्मी की तपिश से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर आस्था की ठंडी छांव में डूबे हजारों श्रद्धालु इस वर्ष के नील गाजन उत्सव में आसनसोल के प्रसिद्ध चंद्रचूड़ मंदिर में उमड़ पड़े। डमरूधारी भोलेनाथ के इस पावन स्थल पर भक्ति, व्रत और मन्नतों की गूंज चारों ओर सुनाई दे रही है।

🙏 दंडवत करते हुए मंदिर पहुँचे श्रद्धालु

श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर प्रांगण में पहुँचते हैं। कुछ ने 5 किलोमीटर तक साष्टांग दंडवत करते हुए यात्रा की, तो कुछ ने 108 बेलपत्र चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ से मन्नत मांगी।

स्थानीय पार्षद श्रावणी मंडल ने बताया कि सुबह से ही मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, और यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। “जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ मन्नत माँगता है, उसकी इच्छा भोलेनाथ ज़रूर पूरी करते हैं,” उन्होंने कहा।

🌍 देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्त

इस बार नील गाजन उत्सव में बिहार, झारखंड, उड़ीसा, और यहां तक कि उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह दर्शाता है कि चंद्रचूड़ मंदिर केवल एक स्थानीय आस्था केंद्र नहीं बल्कि पूर्व भारत का शिवभक्ति का एक महान केंद्र बन चुका है।

🛡️ प्रशासन का विशेष इंतज़ाम

उत्सव को सुचारु और सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने विशेष सुरक्षा व सुविधाओं की व्यवस्था की है। सीसीटीवी कैमरे, मेडिकल कैंप, मोबाइल शौचालय, और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

🎭 भक्ति के साथ संस्कृति का संगम

नील गाजन उत्सव के दौरान कई सांस्कृतिक और लोक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। बाउल संगीत, लोक नृत्य, और धार्मिक कथा वाचन जैसी प्रस्तुतियाँ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद देने के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना से भी जोड़ रही हैं।

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