‘माशाल्लाह ऑफर’ महाठगी: 5 महीने बाद भी पीड़ितों को नहीं मिला इंसाफ

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आसनसोल : आसनसोल उत्तर थाना अंतर्गत रेलपार जहांगीरी मोहल्ला में बीते चार वर्षों से ‘माशाल्लाह ऑफर’ के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के ठगी के मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। इस बहुचर्चित घोटाले का मुख्य आरोपी तहसीन अहमद, जिसे करीब पांच महीने पहले चंद्रचूड़ मंदिर के पास से पुलिस ने आधा किलो सोने के साथ गिरफ्तार किया था, अब भी सवालों के घेरे में है।

बताया जाता है कि तहसीन अहमद गिरफ्तारी के समय फरार होने की कोशिश कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर भी कई तरह के सवाल उठे थे। पुलिस ने उसे आसनसोल कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया और मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पांच महीने बीत जाने के बावजूद ठगी के शिकार हजारों लोगों को अब तक न तो उनका पैसा वापस मिला है और न ही कोई ठोस राहत।

पीड़ितों का आरोप है कि जांच के नाम पर उन्हें ही डराया-धमकाया जा रहा है। ठगी का शिकार होने वालों में सेवानिवृत्त अधिकारी, महिलाएं और आम नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी इस स्कीम में लगा दी थी। कई पीड़ितों ने लाखों तो कई ने करोड़ों रुपये गंवा दिए।

पुलिस के अनुसार, अब तक इस मामले से जुड़े 95 बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है और विभिन्न निवेशकों से पूछताछ कर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ‘माशाल्लाह ऑफर’ के तहत तहसीन अहमद ने कम से कम 3000 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया था। निवेशकों को हर महीने 20 से 30 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया गया, लेकिन अंततः उनकी सारी पूंजी डूब गई।

पीड़ितों का यह भी दावा है कि इस गोरखधंधे में स्थानीय नेता और अन्य प्रभावशाली लोग भी शामिल थे। आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए विशेष छूट दी जाती थी, जिसके चलते यह पूरा खेल लंबे समय तक प्रशासन की नाक के नीचे चलता रहा।

यह मामला न केवल आसनसोल बल्कि पूरे क्षेत्र में बढ़ते साइबर फ्रॉड और आर्थिक अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पोंजी स्कीम्स से बचने के लिए निवेश से पहले संबंधित कंपनी या स्कीम के लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और वैधानिक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य है।

आसनसोल पुलिस ने भविष्य में ऐसे मामलों से लोगों को बचाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। वहीं भाजपा नेता कृष्ण प्रसाद ने इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि निवेशकों की पाई-पाई वापस मिलनी चाहिए, और यदि राज्य पुलिस इस मामले की जांच में सक्षम नहीं है तो इसे ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए।

अब सवाल यह है कि क्या पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा या ‘माशाल्लाह ऑफर’ का यह मामला भी लंबी जांच और आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाएगा।

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