आसनसोल, 16 मई 2025:
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर आसनसोल विशेष सुधारगृह का दृश्य कुछ अलग था। नज़ारा ऐसा कि जेल की ऊँची दीवारों के पार भी प्यार, आंसू और रिश्तों की गर्माहट छलकती नजर आई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और सुधारगृह प्रशासन के विशेष प्रयास से चार विचाराधीन और एक सजा प्राप्त कैदी को उनके परिवार वालों से मिलने का मौका मिला। इनमें से कुछ कैदियों को 4 साल, कुछ को 4 या 6 महीने से परिजनों से कोई संपर्क नहीं था।
👁️🗨️ भावनाओं से भर गया जेल परिसर:
इस खास मौके पर उपस्थित थे—
- एसडीओ विश्वजीत भट्टाचार्य
- डीसी सेंट्रल
- जेल सुपर चायेंद्री हाइट
- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अम्रपाली चक्रवर्ती
सुरक्षा घेरे के बीच पांच परिवारों को जेल के अंदर ले जाया गया, जहां उनका बंद रिश्तेदारों से मिलन कराया गया।
🗣️ प्रशासनिक अधिकारियों की भावुक प्रतिक्रियाएं:
🗨️ एसडीओ विश्वजीत भट्टाचार्य ने कहा:
“एक छोटी बच्ची, जो पिछले चार साल से अपनी माँ से नहीं मिली थी, आज वो माँ की गोद में थी। इससे बड़ा परिवार दिवस का तोहफा क्या हो सकता है?”
🗨️ जेल सुपर चायेंद्री हाइट ने कहा:
“जज साहब और विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से आज का आयोजन संभव हो पाया। वर्षों बाद एक माँ अपनी बेटी से मिली—ये दृश्य शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता।”
🗨️ अम्रपाली चक्रवर्ती (DLSA सचिव):
“एक पिता अपने बेटे से मिला, एक बेटी अपनी माँ से—चाहे कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन हम ये लम्हा उन्हें लौटा पाए। यही हमारा उद्देश्य है।”
📌 कुछ और विशेष पहलु जो जोड़े गए:
- भविष्य में हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय फैमिली डे पर ऐसा आयोजन नियमित रूप से करने की योजना।
- वीडियो कॉल सुविधा के ज़रिए भी संपर्क को और सुलभ बनाने की तैयारी।
- इस तरह के मेल-जोल से कैदियों में सुधार की भावना और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होने की संभावना।
💖 निष्कर्ष:
“कानून अपनी जगह है, लेकिन भावनाओं की कोई सीमा नहीं होती” — इस सिद्धांत को आसनसोल सुधारगृह ने जीवंत कर दिखाया। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर यह अनूठा आयोजन न सिर्फ कैदियों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गया।













