Friday, 25 September 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
आसनसोल में किसानों का एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर, खाद्य सुरक्षा से पर्यावरण संरक्षण तक हुई चर्चा आसनसोल रामकृष्ण मिशन आईटीआई में समावर्तन समारोह, मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने दिया सेवा और ईमानदारी का संदेश आसनसोल में पानी संकट के बीच बड़ा कदम, नए ओवरहेड टैंक से 30 हजार परिवारों को मिलेगा लाभ बर्नपुर सेल में बीएमएस की बड़ी जीत, 2,189 वोटों के साथ बनी सबसे बड़ी यूनियन आसनसोल क्लब में लायंस क्लब का खास आयोजन, शिक्षक रंजना राय चौधरी और पत्रकार चंदन गुप्ता सम्मानित सोनपुर में गृहवधू की जली लाश का रहस्य गहराया, फोरेंसिक टीम ने घर से जुटाए अहम नमूने आसनसोल में किसानों का एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर, खाद्य सुरक्षा से पर्यावरण संरक्षण तक हुई चर्चा आसनसोल रामकृष्ण मिशन आईटीआई में समावर्तन समारोह, मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने दिया सेवा और ईमानदारी का संदेश आसनसोल में पानी संकट के बीच बड़ा कदम, नए ओवरहेड टैंक से 30 हजार परिवारों को मिलेगा लाभ बर्नपुर सेल में बीएमएस की बड़ी जीत, 2,189 वोटों के साथ बनी सबसे बड़ी यूनियन आसनसोल क्लब में लायंस क्लब का खास आयोजन, शिक्षक रंजना राय चौधरी और पत्रकार चंदन गुप्ता सम्मानित सोनपुर में गृहवधू की जली लाश का रहस्य गहराया, फोरेंसिक टीम ने घर से जुटाए अहम नमूने
आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में किसानों का एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर, खाद्य सुरक्षा से पर्यावरण संरक्षण तक हुई चर्चा

Moutushi · 25 September 2026, 5:33 PM

आसनसोल: किसानों को खाद्य सुरक्षा, खाद्य मानकों, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पश्चिम बर्धमान जिले में एकदिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। पश्चिम बंगाल सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं उद्यानपालन विभाग की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर आसनसोल के सर्किट हाउस में हुआ। कार्यक्रम में किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की गई और खेती तथा खाद्य क्षेत्र से संबंधित जरूरी पहलुओं पर चर्चा की गई।

एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित जानकारी देना नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानकों की व्यापक समझ विकसित करना भी रहा। इसके साथ ही पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर भी जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में पेड़-पौधों के वितरण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

खाद्य सुरक्षा को लेकर किसानों को दी गई जानकारी

शिविर के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा की गई। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षित भोजन और खाद्य मानकों का पालन क्यों जरूरी है, इस तरह के विषयों को किसानों के सामने रखा गया।

कृषि उत्पादन से लेकर खाद्य पदार्थों के बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया में स्वच्छता और गुणवत्ता का महत्वपूर्ण स्थान होता है। खेत से निकलने वाली उपज जब उपभोक्ताओं तक पहुंचती है, तब उसकी गुणवत्ता बनाए रखना किसानों के साथ-साथ खाद्य क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की भी जिम्मेदारी होती है। इसी व्यापक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण शिविर में खाद्य सुरक्षा से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई।

किसानों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि बदलते समय के साथ उपभोक्ताओं के बीच सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को खाद्य मानकों और गुणवत्ता से जुड़े बुनियादी पहलुओं की जानकारी होना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

खाद्य मानकों पर भी हुआ मंथन

प्रशिक्षण शिविर में खाद्य मानकों को लेकर भी चर्चा हुई। किसानों को बताया गया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उत्पादन और उससे जुड़े विभिन्न चरणों में सावधानी जरूरी है।

खाद्य सुरक्षा केवल तैयार भोजन तक सीमित विषय नहीं है। कृषि उपज की गुणवत्ता, साफ-सफाई, सुरक्षित रखरखाव, उचित तरीके से संभालना और बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया भी इससे जुड़ी होती है। इसलिए किसानों को इन विषयों की जानकारी देने से खाद्य श्रृंखला के शुरुआती स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

शिविर में खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानकों से जुड़े विषयों को किसानों के लिए उपयोगी तरीके से समझाने का प्रयास किया गया। इससे किसानों को अपनी उपज की गुणवत्ता और उससे जुड़े मानकों के प्रति अधिक सजग होने का अवसर मिला।

पेड़-पौधों के वितरण से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा रहा। विभाग की ओर से पेड़-पौधों के वितरण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

पेड़-पौधे पर्यावरण के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। हरित क्षेत्र बढ़ाने से स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में पेड़-पौधों का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि खेती और प्राकृतिक संसाधन एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं।

किसानों के बीच पौधों का वितरण कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कृषि विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संबंध पर जोर

शिविर में पर्यावरण और स्वास्थ्य के संबंध को लेकर भी चर्चा की गई। स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण का सीधा संबंध मानव जीवन और स्वास्थ्य से है। हवा, पानी, मिट्टी और हरित क्षेत्र जैसे प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता का प्रभाव लोगों के जीवन पर पड़ता है।

किसान इन प्राकृतिक संसाधनों के सीधे संपर्क में रहते हैं। खेती के दौरान मिट्टी, पानी और जैविक संसाधनों का उपयोग होता है। इसलिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता किसानों के लिए विशेष महत्व रखती है।

प्रशिक्षण शिविर में किसानों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कृषि गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पेड़-पौधों का संरक्षण और अधिक से अधिक हरियाली विकसित करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता

एकदिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर जैसे कार्यक्रम किसानों को नई जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकते हैं। कृषि क्षेत्र लगातार बदल रहा है और किसानों को उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता, बाजार, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण जैसे विषयों की जानकारी की भी आवश्यकता होती है।

पश्चिम बर्धमान जैसे औद्योगिक और कृषि दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण समुदाय के लिए उपयोगी हो सकते हैं। आसनसोल में आयोजित शिविर ने किसानों को कृषि से जुड़े पारंपरिक विषयों के साथ खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण जैसे व्यापक मुद्दों पर विचार करने का अवसर दिया।

कार्यक्रम का संदेश यही रहा कि बेहतर कृषि व्यवस्था केवल अधिक उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों का उत्पादन, खाद्य मानकों के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखना भी कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने की पहल

पश्चिम बंगाल सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं उद्यानपालन विभाग की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में किसानों को खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानकों के साथ पर्यावरण तथा स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में पौधों का वितरण इस जागरूकता अभियान को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक कदम रहा।

आसनसोल के सर्किट हाउस में आयोजित यह एकदिवसीय शिविर किसानों के लिए जानकारी और जागरूकता का मंच बना। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि खेती से जुड़े लोगों की भूमिका केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित भोजन, बेहतर स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

आने वाले समय में इस तरह के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते हैं तो किसानों तक खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी को और व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। इससे कृषि क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के साथ उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंचाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रयास को मजबूती मिल सकती है।

Advertisement