देश में जहां साइबर सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपना रही है, वहीं आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी सामने आई है। एक सेवानिवृत्त अभियंता को अपराधियों ने 32 दिन तक “डिजिटल कैद” में रखकर 1.65 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
📞 बीएसएनएल अफसर बनकर किया कॉल, देशद्रोह का डर दिखाया
यह चौंकाने वाला मामला 9 मई से शुरू हुआ, जब आसनसोल नगर निगम के सेवानिवृत्त अभियंता सुकुमार दे को एक कॉल आया।
कॉलर ने खुद को बीएसएनएल का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से मुंबई में एक सिम ली गई है, जो देशविरोधी गतिविधियों, हवाला और पोर्न फिल्म बनाने जैसे मामलों में इस्तेमाल हो रही है।
इसके बाद शुरू हुआ एक ऐसा डिजिटल ड्रामा, जो किसी फिल्म से कम नहीं।
🧾 सुप्रीम कोर्ट का फर्जी लेटर, RBI अकाउंट और रंगराजन के दस्तखत
- अपराधियों ने व्हाट्सएप पर फर्जी सुप्रीम कोर्ट लेटरहेड, बैंक स्टेटमेंट और एक खाते में 20 करोड़ रुपये की जानकारी भेजी।
- दावा किया गया कि यह अकाउंट सुकुमार दे के नाम से खुला है और इसी में अवैध लेनदेन हुआ है।
- डर का माहौल बनाकर उनसे कहा गया कि यदि वो निर्दोष हैं, तो अपनी संपत्ति “जांच के लिए” RBI के खाते में ट्रांसफर करें।
डर और शर्मिंदगी के मारे सुकुमार दे ने अपने बैंक खातों की पूरी रकम, यहां तक कि गहने गिरवी रखकर भी, कुल 1.65 करोड़ रुपये अपराधियों के बताए खातों में भेज दिए।
📹 डिजिटल अरेस्ट: हर 2 घंटे में लोकेशन, दिनभर वीडियो कॉल
- 32 दिनों तक उन्हें एक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया।
- व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी,
- हर दो घंटे में लोकेशन अपडेट देना जरूरी,
- किसी से बात न करना, न बाहर जाना – ये सारी शर्तें लागू थीं।
⚠️ रंगराजन के फर्जी दस्तखत से टूटा भ्रम
जब अपराधियों ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन के फर्जी हस्ताक्षर वाला आदेश भेजा, तब सुकुमार दे को एहसास हुआ कि वह एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए हैं।
🚓 साइबर थाने में केस दर्ज, जांच अब राज्य स्तर पर
11 जून को उन्होंने आसनसोल साइबर थाना में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने मामला केस नंबर 48/25 के तहत दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(2), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2)/61(2) के तहत जांच शुरू की है।
मामला अब राज्य साइबर क्राइम विभाग को सौंपा गया है।
🧠 विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
- साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ठगी पुराने तरीके का नया डिजिटल रूप है, जिसे “डर, भ्रम और तकनीक” के त्रिकोण से अंजाम दिया गया।
- ऐसे मामलों में बैंक, कोर्ट और सरकार की कोई एजेंसी कभी भी व्हाट्सएप या कॉल पर पैसा नहीं मांगती।













