पश्चिम बर्धमान: आसनसोल का रवींद्र भवन दो दिनों तक बंगाल की समृद्ध लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। दक्षिण बंग लोक संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय बंगला संस्कृति उत्सव में न केवल पश्चिम बर्धमान, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
🎭 लोक परंपराओं की जीवंत प्रस्तुति
उत्सव में बाउल गीत, लोकनृत्य, कविगान, जात्रा शैली की झलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अलग–अलग जिलों से पहुंचे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में बच्चों से लेकर वरिष्ठ कलाकारों तक की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। दर्शकों ने भी उत्साहपूर्वक तालियों से कलाकारों का स्वागत किया।
🌟 उद्देश्य: संस्कृति को मंच और कलाकारों को पहचान
अकादमी के पदाधिकारियों ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य बंगला लोक संस्कृति को बढ़ावा देना और विभिन्न जिलों के कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करना है। ऐसे आयोजनों से न केवल कला को संरक्षण मिलता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
🎶 रवींद्र भवन में उमड़ा उत्साह
रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों में खासा उत्साह देखा गया। कई स्थानीय सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक समूहों ने भी इस आयोजन में सहयोग दिया।
📌 सांस्कृतिक विरासत को संजोने की पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते दौर में लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए ऐसे महोत्सव बेहद जरूरी हैं। यह न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
दो दिनों तक चले इस बंगला संस्कृति उत्सव ने यह साबित कर दिया कि आसनसोल केवल औद्योगिक नगरी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का भी अहम केंद्र है।











