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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में शतरंज का महासंग्राम! 170 खिलाड़ियों ने दिखाई चालों की बाजीगरी, 4 साल की बच्ची भी मैदान में

Moutushi · 17 August 2026, 11:56 AM

आसनसोल: आसनसोल में रविवार को आयोजित बंगाल टाइगर द्वितीय ऑफलाइन शतरंज प्रतियोगिता ने खेलप्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘पहल—एक नई शुरुआत’ की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में आसनसोल के अलावा पश्चिम बर्दवान और आसपास के कई क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में कुल 170 प्रतिभागियों ने शतरंज की बिसात पर अपनी रणनीति, धैर्य और खेल कौशल का प्रदर्शन किया।

इस प्रतियोगिता की खासियत केवल प्रतिभागियों की बड़ी संख्या नहीं रही, बल्कि अलग-अलग आयु वर्ग और विभिन्न परिस्थितियों से आए खिलाड़ियों की भागीदारी ने इसे विशेष बना दिया। प्रतियोगिता में महिला, पुरुष और बच्चों के साथ-साथ 8 दृष्टिहीन प्रतिभागी, 2 दिव्यांग प्रतिभागी और थैलेसीमिया से पीड़ित 1 दिव्यांग प्रतिभागी भी शामिल हुए। इससे प्रतियोगिता ने खेल के माध्यम से समान अवसर और समावेशिता का संदेश दिया।

आसनसोल से लेकर बिहार-झारखंड तक पहुंचे खिलाड़ी

बंगाल टाइगर द्वितीय ऑफलाइन शतरंज प्रतियोगिता में आसनसोल के साथ-साथ चित्तरंजन, बर्नपुर, रानीगंज, पानागढ़, बर्दवान, दुर्गापुर, आद्रा, पुरुलिया, बांकुड़ा और बीरभूम से खिलाड़ी पहुंचे। इसके अलावा झारखंड और बिहार से भी शतरंज प्रेमियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

इस तरह एक ही मंच पर अलग-अलग शहरों और राज्यों से आए खिलाड़ियों को खेलने का अवसर मिला। प्रतियोगिता के दौरान शतरंज की बिसात पर खिलाड़ियों के बीच कड़े मुकाबले देखने को मिले। हर खिलाड़ी अपनी अगली चाल को लेकर पूरी तरह केंद्रित नजर आया।

चार साल की बच्ची ने भी संभाली शतरंज की बिसात

प्रतियोगिता में सबसे कम उम्र की प्रतिभागी की उम्र महज 4 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में शतरंज प्रतियोगिता में शामिल होकर इस नन्हीं प्रतिभागी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आमतौर पर शतरंज को धैर्य और एकाग्रता वाला खेल माना जाता है, ऐसे में चार वर्ष की उम्र में प्रतियोगिता में हिस्सा लेना अपने आप में खास रहा।

बच्चों से लेकर बड़े उम्र के प्रतिभागियों तक ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इससे यह भी देखने को मिला कि शतरंज अब केवल किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बच्चे, युवा और बड़े सभी इस खेल में अपनी रुचि दिखा रहे हैं।

दृष्टिहीन खिलाड़ियों ने जीता लोगों का ध्यान

प्रतियोगिता का सबसे प्रेरणादायक पहलू दृष्टिहीन खिलाड़ियों की भागीदारी रही। कुल 8 दृष्टिहीन प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अन्य खिलाड़ियों के साथ शतरंज के मुकाबले खेले।

दृष्टिहीन खिलाड़ियों को तेजी से शतरंज खेलते देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित हुए। उनकी एकाग्रता, आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण प्रतियोगिता में विशेष चर्चा का विषय बना। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी शारीरिक चुनौती को प्रतिभा और जुनून के रास्ते में बाधा बनने की जरूरत नहीं है।

दृष्टिहीन खिलाड़ियों की मौजूदगी ने प्रतियोगिता को केवल एक खेल आयोजन न रखकर प्रेरणा और समान अवसर का मंच भी बना दिया। शतरंज की बिसात पर सभी खिलाड़ियों को अपनी रणनीति और सोच के आधार पर मुकाबला करने का मौका मिला।

अलग-अलग उम्र और क्षमता के खिलाड़ियों का एक मंच

इस प्रतियोगिता में महिला, पुरुष, बच्चे, दृष्टिहीन और दिव्यांग प्रतिभागियों की एक साथ भागीदारी ने आयोजन को खास बनाया। 2 दिव्यांग प्रतिभागियों और थैलेसीमिया से पीड़ित 1 दिव्यांग प्रतिभागी ने भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया।

आयोजकों की पहल से प्रतियोगिता में यह संदेश गया कि खेल में प्रतिभा और इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति की उम्र या शारीरिक स्थिति उसकी क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकती।

23 हजार रुपये का नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और पदक भी

प्रतियोगिता को रोमांचक बनाने के लिए आयोजकों की ओर से पुरस्कारों की भी व्यवस्था की गई थी। कुल 23 हजार रुपये का नकद पुरस्कार रखा गया था। इसके अलावा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए 31 ट्रॉफी और 10 पदक भी प्रदान किए गए।

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिया गया। इससे खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने की पहचान के साथ भविष्य में इस तरह के आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

खिलाड़ियों के लिए भोजन और अल्पाहार की व्यवस्था

आयोजन समिति की ओर से प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया। प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार और दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई थी। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों को भी प्रतियोगिता के दौरान सुविधा मिली।

आयोजकों का प्रयास रहा कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ बेहतर वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

शतरंज ने दिया एकता और समान अवसर का संदेश

बंगाल टाइगर द्वितीय ऑफलाइन शतरंज प्रतियोगिता की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि यहां शतरंज की बिसात पर उम्र, क्षेत्र और शारीरिक क्षमता की सीमाएं पीछे छूटती नजर आईं। आसनसोल से लेकर बिहार और झारखंड तक के खिलाड़ियों ने एक ही मंच पर मुकाबला किया।

चार वर्ष की बच्ची से लेकर बड़े उम्र के खिलाड़ियों तक की मौजूदगी ने प्रतियोगिता को पीढ़ियों के संगम में बदल दिया। वहीं दृष्टिहीन और दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी ने इसे सामाजिक समावेश का भी उदाहरण बनाया।

‘पहल—एक नई शुरुआत’ के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता ने आसनसोल में शतरंज के प्रति बढ़ती रुचि को भी सामने रखा। 170 खिलाड़ियों की भागीदारी से साफ है कि शतरंज को लेकर स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों और अभिभावकों में उत्साह बढ़ रहा है।

प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी चालों से मुकाबले को रोचक बनाया और दर्शकों को भी शतरंज की रणनीति देखने का अवसर मिला। अंत में पुरस्कार, ट्रॉफी, पदक और प्रमाणपत्र देकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया गया।

कुल मिलाकर, बंगाल टाइगर द्वितीय ऑफलाइन शतरंज प्रतियोगिता केवल जीत-हार तक सीमित आयोजन नहीं रहा। चार साल की नन्हीं प्रतिभागी से लेकर दृष्टिहीन और दिव्यांग खिलाड़ियों तक की भागीदारी ने यह साबित किया कि खेल का मैदान हर उस व्यक्ति के लिए खुला है, जिसके भीतर सीखने, खेलने और आगे बढ़ने का जुनून है। आसनसोल में आयोजित यह प्रतियोगिता शतरंज के साथ-साथ प्रतिभा, आत्मविश्वास, समान अवसर और हौसले की कहानी भी बन गई।

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