पश्चिम बंगाल के योग्य और प्रशिक्षित युवा आखिर बार-बार एप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग से वंचित क्यों किए जा रहे हैं? इसी सवाल को लेकर सोमवार की सुबह बहरमपुर के कॉन्फ्लुएंस सेंटर के सामने स्थानीय युवाओं ने तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्श किया।
प्रदर्शनकारी युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर कुछ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक और जातिगत पूर्वाग्रहों के तहत एप्रेंटिसशिप से वंचित किया जा रहा है, जबकि वे हर मानक पर खरे उतरते हैं।
🔥 युवाओं का गुस्सा फूटा:
“हमारे पास योग्यता भी है, ट्रेनिंग भी ली है, फिर भी बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। ये सीधे तौर पर स्थानीय प्रतिभाओं के साथ अन्याय है!” — एक प्रदर्शनकारी युवक ने कहा।
🗣️ तृणमूल नेताओं का समर्थन:
तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लेकर युवाओं को समर्थन दिया और कहा,
“हम इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह मुद्दा हम विधानसभा और प्रशासन दोनों जगह उठाएंगे।”
नेताओं ने अधिकारियों पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया और स्थानीय युवाओं को वाजिब अधिकार देने की मांग की।
🚨 युवाओं की प्रमुख मांगें:
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
- स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच हो
- एप्रेंटिसशिप के लिए स्थायी समिति का गठन हो
📸 सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं तस्वीरें:
विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें युवा “न्याय दो, रोजगार दो” के नारे लगाते दिख रहे हैं।
🧠 विशेषज्ञों की राय:
रोजगार के मुद्दे पर स्थानीय बनाम बाहरी की राजनीति नया नहीं है, लेकिन जब लगातार योग्य स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह सामाजिक असंतोष को जन्म देता है।










