आसनसोल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया में डीवाईएफआई के शाखा सम्मेलन के दौरान अचानक हिंसक झड़प होने से इलाके में तनाव फैल गया। जामुड़िया थाना अंतर्गत वार्ड संख्या-1 के नंदी इलाके में आयोजित सम्मेलन के बीच दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और बीच सड़क पर लाठियां चलने लगीं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। डीवाईएफआई समर्थकों ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने घटना से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
शांतिपूर्ण सम्मेलन के बीच अचानक कैसे बिगड़ा माहौल?
मिली जानकारी के अनुसार, नंदी इलाके में डीवाईएफआई की ओर से शाखा सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा था। संगठन के समर्थकों का दावा है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। इसी दौरान भगवा कपड़े पहने कुछ लोग कथित तौर पर वहां पहुंचे। डीवाईएफआई समर्थकों का आरोप है कि इन लोगों ने खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताया और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया।
आरोप है कि कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और लाठियों से हमला किया जाने लगा। अचानक हुई इस घटना से सम्मेलन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई।
हालांकि, घटनास्थल पर सबसे पहले विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और हिंसा की शुरुआत किस पक्ष ने की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच वास्तविक घटनाक्रम का पता पुलिस जांच के बाद ही चल सकेगा।
सड़क पर दोनों पक्षों के बीच लाठीबाजी
डीवाईएफआई समर्थकों के अनुसार, कथित हमले के बाद उनके कार्यकर्ताओं ने बचाव में लाठियां उठा लीं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। सड़क पर लाठियां चलने से आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो गया कि सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ विवाद इतनी जल्दी हिंसक टकराव में कैसे बदल गया।
घटना के दौरान इलाके में काफी तनाव पैदा हो गया। राजनीतिक कार्यक्रम के बीच इस तरह की झड़प ने एक बार फिर जामुड़िया में राजनीतिक टकराव और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीपीएम नेता मनोज दत्ता ने लगाए गंभीर आरोप
इस घटना को लेकर सीपीएम नेता मनोज दत्ता ने कई गंभीर आरोप लगाए। डीवाईएफआई समर्थकों की ओर से भी भाजपा से जुड़े लोगों पर कार्यक्रम में बाधा डालने और हमला करने का आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि संगठन का सम्मेलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, लेकिन कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर माहौल बिगाड़ दिया।
वामपंथी नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक कार्यक्रमों में इस तरह की बाधा लोकतांत्रिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। हालांकि, मनोज दत्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना में शामिल लोगों की पहचान और विवाद की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, भाजपा ने डीवाईएफआई समर्थकों द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि भाजपा हिंसा की राजनीति में विश्वास नहीं करती और जामुड़िया के नंदी इलाके में हुई घटना से उसका कोई संबंध नहीं है।
भाजपा का दावा है कि इस घटना में पार्टी का कोई नेता या समर्थक शामिल नहीं था। पार्टी ने कहा कि केवल भगवा कपड़े पहने होने के आधार पर किसी व्यक्ति को भाजपा कार्यकर्ता बताना उचित नहीं है। घटना में शामिल लोगों की पहचान और उनकी राजनीतिक संबद्धता की पुष्टि जांच के आधार पर होनी चाहिए।
निकाय चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने का आरोप
भाजपा की ओर से इस घटनाक्रम को आगामी नगर निकाय चुनावों से जोड़कर भी देखा गया। पार्टी का आरोप है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बिगाड़ने और भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश की जा सकती है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि जामुड़िया की घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह सामने आ सके कि सम्मेलन के दौरान विवाद शुरू करने और मारपीट करने वाले लोग वास्तव में किस राजनीतिक दल से जुड़े थे। पार्टी ने यह भी कहा कि उसे घटना की जानकारी मिली है और वह अपने स्तर पर भी पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है।
विधायक बिजन मुखर्जी ने भी दी प्रतिक्रिया
इस मामले पर जामुड़िया के विधायक बिजन मुखर्जी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को लेकर भाजपा के आरोपों और पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा। हालांकि, उनकी प्रतिक्रिया के विस्तृत शब्द और अतिरिक्त विवरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए इस संबंध में किसी विशेष बयान या आरोप को उनके नाम से जोड़ना उचित नहीं होगा।
पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल नंदी इलाके में हुई इस झड़प ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ डीवाईएफआई समर्थक भाजपा से जुड़े लोगों पर हमले का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा ने घटना से अपना संबंध होने से साफ इनकार किया है। दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों के बीच अब पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई, हिंसा में कौन-कौन शामिल था और क्या घटना के पीछे कोई राजनीतिक कारण था। साथ ही, यदि किसी पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो उसके आधार पर पुलिस को मामले की आगे की कार्रवाई करनी होगी।
जामुड़िया में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले इस तरह की हिंसक घटना ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल इलाके की स्थिति और पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।




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