गढ़बेता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पुराने राजनीतिक हिंसा के मामलों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के गढ़बेता में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ’ सभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस और माकपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में पिछले वर्षों के दौरान हुई कथित राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का हिसाब लेने की बात कही। साथ ही 2007 के नंदीग्राम के चर्चित ‘ऑपरेशन सूर्योदय’ मामले की फाइल दोबारा खोलने का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में झाड़ग्राम, केशपुर, चंद्रकोना, छोटे आंगरिया और नंदीग्राम की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू होने की संभावना है।
प्रणत टुडू पर कथित हमले की एफआईआर मांगी
सभा में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान झाड़ग्राम में भाजपा उम्मीदवार प्रणत टुडू के साथ हुई कथित मारपीट की घटना का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दिन प्रणत टुडू पर हमला किया गया था, जिसमें उनके सिर पर चोट लगी थी। उनके सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात भी कही गई थी।
घटना के बाद प्रणत टुडू ने गढ़बेता अस्पताल में इलाज कराया था और पुलिस तथा चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शनिवार की सभा में मुख्यमंत्री ने इस मामले की एफआईआर की प्रति मांगी और सवाल उठाया कि घटना के बाद अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सभा में मौजूद प्रणत टुडू की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “2024 के लोकसभा चुनाव के दिन प्रणत टुडू का सिर फोड़ दिया गया था, याद है? उस दिन की एफआईआर की कॉपी मुझे दीजिए। मैं देखूंगा कि इस घटना में कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है।”
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि जिन आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है, उन्हें पकड़कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने केशपुर में भी इसी तरह अत्याचार किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं गया है।
चंद्रकोना में अपने काफिले पर हमले का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पहले चंद्रकोना में अपने काफिले पर हुए कथित हमले को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पुरुलिया से लौटते समय चंद्रकोना में उनके काफिले को निशाना बनाया गया था। इस घटना के बाद उन्हें पूरी रात थाने में बैठना पड़ा था और उस दिन कई अन्य लोग भी घायल हुए थे।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उस घटना को भी वह भूले नहीं हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक हिंसा की किसी भी घटना को अनदेखा नहीं किया जाएगा और सभी मामलों का हिसाब लिया जाएगा। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष के दौरान हुई घटनाओं को भी सभा के मंच से उठाया।
माकपा पर निशाना, ‘ऑपरेशन सूर्योदय’ की फाइल खोलने का ऐलान
तृणमूल कांग्रेस पर हमला करने के बाद मुख्यमंत्री ने माकपा को भी निशाने पर लिया। उन्होंने पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम की एक टिप्पणी की आलोचना की और इसके बाद वर्ष 2007 में नंदीग्राम में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम मेदिनीपुर के गढ़बेता स्थित माकपा के पार्टी कार्यालय से हथियार नंदीग्राम भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि छोटे आंगरिया से लेकर नंदीग्राम तक राजनीतिक हिंसा से जुड़े पुराने मामलों को फिर से खोला जाएगा। विशेष रूप से उन्होंने नंदीग्राम के ‘ऑपरेशन सूर्योदय’ की फाइल दोबारा खोलने की बात कही।
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि इन घटनाओं से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, इन आरोपों और प्रस्तावित कार्रवाई पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
क्या था 2007 का नंदीग्राम ‘ऑपरेशन सूर्योदय’?
नंदीग्राम में वर्ष 2007 के दौरान भूमि अधिग्रहण के विरोध में बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की सरकार थी। भूमि अधिग्रहण के विरोध में स्थानीय लोगों और आंदोलनकारियों का संघर्ष लंबे समय तक चला। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में 10 नवंबर 2007 को तत्कालीन सत्तारूढ़ माकपा की ओर से ‘ऑपरेशन सूर्योदय’ अभियान चलाए जाने का उल्लेख किया जाता है। इस दौरान हुई हिंसक घटनाओं में भूमि आंदोलन से जुड़े कई लोगों की जान गई थी।
नंदीग्राम की घटनाओं ने राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया था। तृणमूल कांग्रेस हर साल 10 नवंबर को वहां शहीद स्मरण कार्यक्रम आयोजित करती रही है। भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी भी अलग से इस दिन कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसलिए ‘ऑपरेशन सूर्योदय’ का मुद्दा आज भी बंगाल की राजनीति में संवेदनशील और महत्वपूर्ण बना हुआ है।
तपन घोष और सुकुर अली का भी उठाया नाम
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में छोटे आंगरिया और नंदीग्राम हिंसा से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन माकपा के प्रभावशाली नेताओं तपन घोष और सुकुर अली का नाम भी लिया। उन्होंने सवाल किया कि तपन घोष फिलहाल कहां हैं और संबंधित मामलों में आगे क्या कार्रवाई हुई है।
इस दौरान उन्होंने जिले की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना की ओर देखते हुए आरोपियों को तलाश कर सामने लाने का निर्देश देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह संबंधित लोगों को जेल में देखना चाहते हैं।
गढ़बेता की ‘लोकतंत्र बचाओ’ सभा में मुख्यमंत्री का पूरा भाषण पुराने राजनीतिक हिंसा के मामलों और कथित अत्याचारों के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और माकपा दोनों को निशाने पर लेते हुए जांच और कार्रवाई का संकेत दिया। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद संबंधित मामलों की फाइलें वास्तव में दोबारा खुलती हैं या नहीं और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।




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