कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल में उद्योग, निवेश और रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी निवेशकों का स्वागत है, लेकिन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में आयोजित विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सम्मेलन के आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित औद्योगिक परिणाम सामने नहीं आए। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार हर महीने नए काम और औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान देगी।
‘हर महीने कुछ नया काम होगा’, उद्योग पर मुख्यमंत्री का जोर
कोजागरी लक्ष्मी पूजा के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनके मुताबिक, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े औद्योगिक समूह पश्चिम बंगाल में निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभिन्न स्थानों पर परियोजनाओं का काम शुरू हो चुका है और कुछ परियोजनाओं के लिए पहले ही आधारशिला रखी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास किसी एक बड़े आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। हर महीने नए काम या परियोजनाओं से जुड़ी प्रगति सामने लाने की योजना है। हालांकि, जिन परियोजनाओं का उन्होंने उल्लेख किया, उनके नाम, निवेश की कुल राशि, रोजगार सृजन के लक्ष्य और पूरा होने की समय-सीमा का विस्तृत ब्योरा इस बयान में नहीं दिया गया।
ऐसे में राज्य में निवेश की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए परियोजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन, रोजगार और उत्पादन से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे।
विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में आयोजित विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन को लेकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सम्मेलन के आयोजन पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन राज्य को औद्योगिक विकास के मामले में अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
उन्होंने पिछली सरकार की बैठकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी सरकार की बैठकें चाय-बिस्कुट और चाय-समोसे तक सीमित नहीं रहेंगी। उनके बयान का मुख्य जोर यह था कि औद्योगिक बैठकों और निवेश संबंधी चर्चाओं के परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए।
विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन का उद्देश्य निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित करना रहा है। हालांकि, सम्मेलन पर खर्च, घोषित निवेश और वास्तव में लागू हुई परियोजनाओं के बीच अंतर समझने के लिए अलग-अलग वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों की तुलना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए; सम्मेलन की सफलता या विफलता का निष्कर्ष केवल इस बयान के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
अडानी समूह और आईआईटी संस्थानों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने निवेश के साथ-साथ कौशल विकास को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ समझौते किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अडानी समूह सहित बड़े औद्योगिक समूहों के साथ समझौते भी पूरे किए जा चुके हैं।
कौशल विकास की पहल का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना हो सकता है। आधुनिक तकनीक, उत्पादन, सेवा क्षेत्र और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग को देखते हुए शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, मुख्यमंत्री के बयान में इन समझौतों के तहत कितने युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा, कितनी नौकरियां पैदा होंगी और परियोजनाएं कब शुरू होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। इसलिए इन घोषणाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे मिलने वाले आधिकारिक आंकड़ों से ही किया जा सकेगा।
रोजगार, किसानों की खुशहाली और स्वास्थ्य-शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल में आर्थिक समृद्धि आने, युवाओं को रोजगार मिलने, दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के अपने घर लौटने और किसानों की स्थिति बेहतर होने की कामना की। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक काम करने की बात कही।
राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाना उद्योग नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। निवेश तभी व्यापक आर्थिक लाभ दे सकता है, जब उससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, छोटे कारोबारों के लिए अवसर और संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें। इसी तरह किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कृषि से जुड़ी सुविधाओं, बाजार और आधारभूत ढांचे की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है।
मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों में काम करने की बात कही है, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि के लिए प्रस्तावित नई योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम सामने आना अभी बाकी है।
चोरबागान हादसे में मृत कल्पना जाना के परिवार से मिले मुख्यमंत्री
औद्योगिक विकास पर बयान देने से पहले मुख्यमंत्री ने उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में हुई भगदड़ में जान गंवाने वाली कल्पना जाना के परिवार से भी मुलाकात की। कल्पना जाना पूर्व मेदिनीपुर जिले के रामनगर की निवासी थीं।
रविवार को उनके घर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। उन्होंने परिवार के बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद करने का भरोसा भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को अभिभावक के रूप में उनकी सहायता उपलब्ध रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के 17 मृतकों के परिवारों से वह व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं। बिहार के रहने वाले दो अन्य मृतकों के परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लिए राज्य मंत्री उमेश राय को भेजने की बात भी कही।
अब घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री के बयान में उद्योग, निवेश, कौशल विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने पिछली सरकार के औद्योगिक सम्मेलन पर सवाल उठाते हुए अपनी सरकार की कार्यशैली को नियमित परियोजनाओं और कामकाज से जोड़कर पेश किया।
अब महत्वपूर्ण यह होगा कि निवेश से जुड़े समझौते कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं, स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिलता है और घोषित योजनाओं का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आमंत्रित करने और हर महीने नए काम आगे बढ़ाने की बात कही है। इन घोषणाओं के वास्तविक परिणाम परियोजनाओं की प्रगति, रोजगार के आंकड़ों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से स्पष्ट होंगे।




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