Monday, 26 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

विधायक बनने के बाद संपत्ति में करोड़ों की बढ़ोतरी का आरोप, प्रधानमंत्री कार्यालय ने जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष को लिखा

Moutushi · 26 October 2026, 9:52 AM

दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई की संपत्ति, परिवार के सदस्यों की नौकरी और जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ध्रुवज्योति मुखर्जी ने विधायक पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत करने का दावा किया है। इस मामले में केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के प्रमुख सचिव को पत्र भेजे जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर, लक्ष्मण चंद्र घोरुई ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय तक कैसे पहुंचा मामला?

ध्रुवज्योति मुखर्जी, जो भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं, ने विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई के खिलाफ संपत्ति और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर शिकायत की है। उनका दावा है कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र और ईमेल भेजे थे। बाद में शिकायत को सार्वजनिक शिकायत पोर्टल के माध्यम से दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई गई।

‘ई समय’ की रिपोर्ट के अनुसार, 12 अक्टूबर के पत्र में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की ओर से मामले को उचित कार्रवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था। इस पत्र के सामने आने के बाद दुर्गापुर के राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, शिकायत को संबंधित प्राधिकारी तक भेजा जाना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने या किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने का प्रमाण नहीं है।

विधायक की संपत्ति में बढ़ोतरी का क्या है आरोप?

ध्रुवज्योति मुखर्जी का आरोप है कि वर्ष 2021 में पहली बार विधायक बनने के बाद से लक्ष्मण चंद्र घोरुई की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शिकायतकर्ता ने विधायक की संपत्ति, जमीन और अन्य आर्थिक मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन विषयों से संबंधित जानकारी और दस्तावेज शिकायत के साथ भेजे गए हैं।

हालांकि, संपत्ति में वृद्धि का आरोप और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने का आरोप दो अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति की संपत्ति बढ़ने के कारणों को समझने के लिए आय के स्रोत, कारोबार, निवेश, संपत्ति की खरीद-बिक्री, कर्ज और अन्य वित्तीय विवरणों की जांच जरूरी होती है। केवल संपत्ति की कुल कीमत में अंतर के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति के आंकड़े

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनावी हलफनामों के आंकड़े भी इस मामले में महत्वपूर्ण हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स से जुड़े मायनेटा के रिकॉर्ड के अनुसार, लक्ष्मण चंद्र घोरुई ने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान लगभग 1.16 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी। वर्ष 2026 के चुनाव से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 2.44 करोड़ रुपये दर्ज है।

इन आंकड़ों के अनुसार, दोनों चुनावों के बीच घोषित कुल संपत्ति में अंतर दिखाई देता है। लेकिन इन आंकड़ों से अकेले यह साबित नहीं होता कि संपत्ति में हुई वृद्धि गैरकानूनी है। इसके लिए संपत्ति के स्रोत, संबंधित दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की परिस्थितियों का परीक्षण आवश्यक होगा। चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्ति और किसी शिकायत में लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन अलग-अलग तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

बेटे, बेटी और दामाद की नौकरी पर भी उठाए सवाल

ध्रुवज्योति मुखर्जी ने विधायक के बेटे, बेटी और दामाद की नौकरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने विधायक की पत्नी के नाम पर जमीन होने और उसके मालिकाना हक से संबंधित मुद्दे भी उठाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन मामलों की जांच होनी चाहिए।

इन आरोपों के संबंध में परिवार के सदस्यों की नौकरी, नियुक्ति की प्रक्रिया, जमीन के दस्तावेज और संबंधित आर्थिक विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायतकर्ता के दावों का उल्लेख है, लेकिन इन आरोपों को किसी जांच में प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

लक्ष्मण चंद्र घोरुई ने आरोपों को बताया झूठा

विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। टीवी9 बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि उनकी कोई भी अघोषित संपत्ति नहीं है और उनकी संपत्ति से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी कहीं नौकरी नहीं करती।

विधायक का आरोप है कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने और उनकी प्रगति को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, बेटी और दामाद को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया। इस तरह, शिकायतकर्ता के आरोपों के विपरीत विधायक ने अपनी ओर से सफाई पेश की है। <Cite refs={[“turn887126view0”]}/>

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

मामले के सामने आने के बाद दुर्गापुर और पश्चिम बर्दवान के राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर शिकायतकर्ता ने संपत्ति और परिवार से जुड़े सवालों की जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर विधायक ने आरोपों को निराधार बताते हुए अपनी छवि खराब करने की कोशिश करार दिया है।

ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें सार्वजनिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि की संपत्ति और उससे जुड़े आरोपों का सवाल शामिल है। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, चुनावी हलफनामों, आय के स्रोतों और शिकायत में दिए गए साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना जरूरी होगा।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल केंद्रीय मंत्रालय का पत्र विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर मामले को आगे बढ़ाने से संबंधित बताया गया है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस पत्र के आधार पर आगे किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और क्या किसी औपचारिक जांच का आदेश दिया गया है।

कुल मिलाकर, दुर्गापुर पश्चिम के भाजपा विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई की संपत्ति और परिवार से जुड़े मामलों पर लगाए गए आरोप अब संबंधित सरकारी स्तर तक पहुंच गए हैं। लेकिन शिकायत, पत्राचार और जांच की प्रक्रिया को आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों की जांच, सक्षम प्राधिकारी के निर्णय और आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।

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