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आसनसोल-दुर्गापुर

मोबाइल टावर लगवाने के नाम पर लाखों की ठगी! दुर्गापुर में किराये के मकान से चल रहा था कथित साइबर गिरोह

Moutushi · 24 October 2026, 12:15 PM

दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: मोबाइल टावर लगाने के नाम पर मकान और जमीन मालिकों को मोटी रकम देने का लालच देकर कथित रूप से साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित बेनाचिती इलाके में एक किराये के मकान में कार्यालय खोलकर ठगी का कारोबार चलाए जाने के आरोप के बाद पुलिस ने छापेमारी की। इस कार्रवाई में तीन युवतियों समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से कई फर्जी पहचान पत्र, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, लैंडलाइन फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस कथित गिरोह के तार बिहार से जुड़े होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि गिरोह में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के युवक-युवतियों को भी शामिल किया गया था। हालांकि, मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों की भूमिका और ठगी से संबंधित वास्तविक रकम का पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की छापेमारी

जानकारी के अनुसार, दुर्गापुर थाना पुलिस को बेनाचिती इलाके में एक किराये के मकान से संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने संबंधित मकान में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां से सात लोगों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी के दौरान मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों ने पुलिस की जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी है। बरामद सामग्री में कई पहचान पत्र, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और लैंडलाइन फोन शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित ठगी के लिए किस प्रकार किया जाता था और क्या इनके माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संपर्क किया जाता था।

एक किराये के मकान में कार्यालय बनाकर इस तरह की गतिविधियां चलाए जाने का आरोप सामने आने के बाद इलाके में भी चर्चा तेज हो गई है।

कैसे दिया जाता था मोबाइल टावर लगाने का लालच?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों का कथित तरीका मोबाइल सेवा कंपनियों के टावर लगाने की योजना से जुड़ा था। इस तरीके में मकान या जमीन मालिकों को उनकी संपत्ति पर मोबाइल टावर स्थापित करने के बदले मोटी रकम मिलने का प्रलोभन दिया जाता था।

आम तौर पर मोबाइल टावर लगाने के प्रस्ताव में नियमित किराये, आकर्षक भुगतान या अतिरिक्त आर्थिक लाभ की बातें लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। इसी तरह के लालच का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की आशंका की जांच की जा रही है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आरोपियों ने पीड़ितों से किस प्रक्रिया के तहत पैसे मांगे, कितने लोगों को निशाना बनाया गया और कुल कितनी रकम की ठगी हुई। इन सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संपर्क करने का आरोप

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बेनाचिती स्थित कथित कार्यालय से देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों से संपर्क किया जाता था। इस सिलसिले में बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और लैंडलाइन फोन जांच के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि बरामद सिम कार्ड किन लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, फोन और लैपटॉप से किन नंबरों पर संपर्क किया गया तथा संभावित पीड़ितों की पहचान क्या है। फर्जी पहचान पत्रों की बरामदगी के बाद यह भी जांच का विषय है कि उनका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति की पहचान छिपाने या कथित ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में किया गया था या नहीं।

यदि अलग-अलग राज्यों के लोगों से संपर्क किए जाने की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा दुर्गापुर से बाहर भी बढ़ सकता है।

बिहार के गिरोह से संबंध की जांच

इस मामले में बिहार के एक गिरोह की संलिप्तता का आरोप सामने आया है। साथ ही, पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के युवक-युवतियों को कथित तौर पर इस गतिविधि में शामिल किए जाने की बात भी कही जा रही है।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कथित नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, किराये के मकान का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और गिरफ्तार लोगों के बीच क्या भूमिका-विभाजन था। यह भी जांच का विषय है कि बरामद दस्तावेज असली लोगों की जानकारी का दुरुपयोग करके तैयार किए गए थे या किसी अन्य तरीके से प्राप्त किए गए थे।

फिलहाल, किसी आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

मोबाइल टावर के नाम पर होने वाली ठगी से कैसे बचें?

इस घटना ने एक बार फिर लोगों को आकर्षक आर्थिक प्रस्तावों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत याद दिलाई है। मोबाइल टावर लगाने के नाम पर संपर्क करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी की सत्यता जांचे बिना पैसे देना जोखिम भरा हो सकता है।

मकान या जमीन मालिकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • टावर लगाने का प्रस्ताव देने वाली कंपनी और एजेंसी की आधिकारिक पहचान की जांच करें।
  • किसी भी व्यक्ति को सत्यापन किए बिना पंजीकरण, सुरक्षा जमा या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे न दें।
  • केवल फोन कॉल, संदेश या सोशल मीडिया पर मिले प्रस्ताव पर भरोसा न करें।
  • किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तें ध्यान से पढ़ें।
  • संदिग्ध कॉल, फर्जी दस्तावेज या पैसे की मांग सामने आने पर पुलिस को सूचना दें।
  • ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से ठगी होने पर तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

जांच के बाद सामने आएगी ठगी के नेटवर्क की पूरी तस्वीर

दुर्गापुर के बेनाचिती इलाके में हुई इस कार्रवाई के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कथित गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और क्या ठगी की रकम लाखों रुपये तक पहुंची है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में कुल ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस की जांच में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, पहचान पत्रों और सिम कार्ड की पड़ताल से कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके के बारे में अहम जानकारी मिलने की संभावना है। सात लोगों की गिरफ्तारी को इस मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन पूरे नेटवर्क की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल, मोबाइल टावर लगाने के नाम पर ठगी करने का आरोप जांच के दायरे में है। आरोपियों को दोषी मानने से पहले कानूनी प्रक्रिया और अदालत में आरोपों की पुष्टि होना आवश्यक है।

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