Saturday, 26 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

अंडाल के खान्दरा में फिर धंसी जमीन, एक महीने में दूसरी घटना से मचा हड़कंप

Moutushi · 26 September 2026, 8:40 PM

अंडाल: पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल थाना क्षेत्र अंतर्गत खान्दरा में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। प्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर के पास शुक्रवार रात अचानक जमीन का एक हिस्सा धंस गया और खाली जमीन में बड़ा गड्ढा बन गया। एक महीने के भीतर दूसरी बार जमीन धंसने की घटना सामने आने से स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बीच केवल तत्काल सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कर खतरे की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाना जरूरी है।

शुक्रवार रात जमीन धंसने की सूचना फैलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि इस बार धंसाव खाली जमीन में हुआ, लेकिन आसपास आबादी और धार्मिक स्थल होने के कारण ग्रामीणों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन धंसने की घटनाएं इसी तरह जारी रहीं तो भविष्य में आबादी वाले हिस्सों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

एक महीने में दूसरी घटना से बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही नीलकंठ मंदिर के समीप आबादी वाले क्षेत्र में जमीन धंसने की घटना हुई थी। उस समय अचानक जमीन धंसने के बाद स्थानीय लोगों में काफी भय पैदा हो गया था। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे और घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी।

पिछली घटना के बाद रानीगंज के विधायक पार्थ घोष भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को समझने की कोशिश की थी और आवश्यक सहयोग का भरोसा दिया था। घटना के बाद ईसीएल की ओर से धंसाव वाले स्थान को खतरनाक घोषित करते हुए वहां फेंसिंग भी कराई गई थी, ताकि लोग अनजाने में खतरे वाले हिस्से के करीब न जाएं।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा के लिए तत्काल घेराबंदी किए जाने के बाद भी स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दी। अब एक बार फिर उसी क्षेत्र में जमीन धंसने की घटना ने पुराने सवालों को और गंभीर कर दिया है।

पुराने खनन क्षेत्र को लेकर भी सवाल

खान्दरा क्षेत्र में जमीन धंसने की घटना को लेकर पुराने खनन कार्यों से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पिछली घटना के दौरान ईसीएल के अधिकारियों की ओर से धंसाव को वर्ष 1982 की पुरानी खदान से जुड़ा बताया गया था। हालांकि जमीन धंसने के वास्तविक कारण की विस्तृत तकनीकी जांच के संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि धंसाव का संबंध पुराने भूमिगत खनन क्षेत्र से है तो विशेषज्ञों की टीम से पूरे इलाके का सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। जमीन के नीचे पुराने खनन क्षेत्र, भूमिगत खाली हिस्सों और वर्तमान स्थिति की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भविष्य में किन क्षेत्रों में खतरा अधिक है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल उस स्थान की घेराबंदी करने के बजाय आसपास के विस्तृत क्षेत्र की भी जांच की जाए। इससे संभावित खतरनाक स्थानों की पहचान पहले से की जा सकेगी और वहां रहने वाले लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की जानकारी दी जा सकेगी।

ग्रामीण ने लगाए गंभीर आरोप

खान्दरा निवासी आकाश रुईदास ने विश्वेश्वरी कोलियरी के प्रबंधक विश्वजीत राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि खनन कार्य के बाद भूमिगत हिस्सों में नियमानुसार बालू भराई और पैकिंग नहीं किए जाने के कारण जमीन धंसने की स्थिति बन रही है। उन्होंने खनन कार्यों में कथित अनियमितता और मिलीभगत के भी आरोप लगाए हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष की ओर से भी इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में जमीन धंसने के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक और तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुराने खनन क्षेत्र और वर्तमान भूगर्भीय स्थिति के बीच कोई संबंध है तो इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि इलाके में किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

शनिवार सुबह ईसीएल अधिकारी पहुंचे

शुक्रवार रात की घटना के बाद शनिवार सुबह ईसीएल के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने धंसाव वाले स्थान का निरीक्षण किया। हालांकि मीडिया के सामने अधिकारियों ने कोई बयान देने से इनकार कर दिया। इसके कारण जमीन धंसने की घटना के कारण और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन को घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। लगातार दूसरी बार जमीन धंसने की घटना के बाद केवल घटनास्थल की निगरानी के बजाय आसपास के इलाकों में भी संभावित खतरे का आकलन जरूरी है।

स्थायी सुरक्षा और पुनर्वास की मांग

लगातार हो रही जमीन धंसने की घटनाओं के बीच खान्दरा के ग्रामीणों ने प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन से कई मांगें रखी हैं। इनमें खतरनाक क्षेत्रों की पहचान, पूरे इलाके का तकनीकी सर्वेक्षण, भूमिगत खनन क्षेत्र की जांच, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और संभावित प्रभावित परिवारों की पहचान प्रमुख हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी आबादी वाले क्षेत्र पर खतरा सामने आता है तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी ठोस कदम उठाया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे की पहले पहचान करना अधिक जरूरी है।

एक महीने के भीतर दूसरी बार जमीन धंसने की घटना ने खान्दरा में पुराने खनन क्षेत्रों और वर्तमान आबादी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और ईसीएल की अगली कार्रवाई पर है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की तकनीकी जांच कर जमीन धंसने के कारणों को स्पष्ट किया जाए और यदि किसी क्षेत्र को असुरक्षित पाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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