कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। राज्य भाजपा ने सात सांगठनिक जिलों के अध्यक्ष बदल दिए हैं। इसके साथ ही पार्टी के चार प्रमुख मोर्चों में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। राज्य सरकार में मंत्री बनने वाले कई नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति को प्रमुख आधार बनाया गया है। साथ ही निकाय चुनाव से पहले संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की रणनीति के तहत भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है।
दिल्ली बैठक के बाद सामने आया बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल भाजपा में यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ बैठक हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को नितिन नवीन के साथ शुभेंदु अधिकारी और शमिक भट्टाचार्य की बैठक हुई। इसके अगले दिन यानी शुक्रवार को राज्य भाजपा की ओर से संगठनात्मक बदलावों की घोषणा की गई।
पार्टी के स्तर पर इसे आगामी निकाय चुनाव से पहले संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी स्तर पर तैयार करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 27 सितंबर से पश्चिम बंगाल दौरे का कार्यक्रम भी है।
सात सांगठनिक जिलों में नए अध्यक्ष
भाजपा ने सात सांगठनिक जिलों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। इनमें उत्तर 24 परगना, हुगली, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व बर्दवान से जुड़े महत्वपूर्ण सांगठनिक जिले शामिल हैं।
बनगांव: नृपेन विश्वास
बारासात: दीपांकर चक्रवर्ती
श्रीरामपुर: शशि सिंह
आरामबाग: प्रशांत दिगार
मेदिनीपुर: सौमेन तिवारी
बर्धमान: आशीष पाल
कटवा: मानिक राय
इन नियुक्तियों के साथ पार्टी ने जिलास्तर पर संगठन की कमान नए चेहरों को सौंपी है।
मंत्रियों को संगठनात्मक पदों से हटाया गया
इस फेरबदल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राज्य सरकार में मंत्री बने नेताओं की संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ सिद्धांत के तहत कई मंत्रियों को संगठन के पदों से मुक्त किया गया है।
इनमें तापस राय, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अग्निमित्रा पाल, दीपक बर्मन और इंद्रनील खां समेत अन्य नेताओं के नाम सामने आए हैं। पहले ये नेता सरकार में मंत्री पद संभालने के साथ-साथ पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर थे। अब मंत्री पद और संगठनात्मक पदों के बीच अलग-अलग जिम्मेदारी रखने की नीति के तहत बदलाव किया गया है।
महिला और युवा मोर्चे में भी बड़ा बदलाव
राज्य भाजपा के चार मोर्चों के अध्यक्षों में भी परिवर्तन किया गया है। महिला मोर्चा की जिम्मेदारी अंजना बसु को दी गई है। उन्होंने फाल्गुनी पात्रा की जगह ली है। अंजना बसु के पार्टी संगठन में आने से महिला मोर्चे को नया नेतृत्व मिला है।
युवा मोर्चा की कमान अमता के विधायक अमित सामंत को सौंपी गई है। उन्होंने इंद्रनील खां की जगह ली है। इंद्रनील खां के राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद युवा मोर्चे की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया।
इसके अलावा ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी धनंजय घोष और एससी मोर्चा की जिम्मेदारी विश्वजीत सामंत को दी गई है। इस तरह पार्टी के युवा, महिला, एससी और ओबीसी मोर्चों में एक साथ नेतृत्व परिवर्तन हुआ है।
राज्य कमेटी में भी बदलाव
जिला और मोर्चा स्तर के साथ भाजपा की राज्य कमेटी में भी परिवर्तन किया गया है। शर्वरी मुखोपाध्याय को राज्य सचिव के पद से हटाया गया है। वहीं संगठन में कई अन्य पदों पर भी नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, चार मौजूदा महासचिव अपने पदों पर बने रहेंगे, जबकि पांच नए उपाध्यक्ष और चार नए सचिव नियुक्त किए गए हैं। इससे साफ है कि बदलाव केवल जिलास्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य संगठन की संरचना में भी व्यापक पुनर्संयोजन किया गया है।
निकाय चुनाव से पहले संगठन पर फोकस
पश्चिम बंगाल में निकाय चुनाव नजदीक आने के साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। भाजपा के इस फेरबदल को भी इसी राजनीतिक और संगठनात्मक संदर्भ में देखा जा रहा है। खासकर सात सांगठनिक जिलों में अध्यक्ष बदलने और चार मोर्चों में नए नेतृत्व की नियुक्ति से जिलास्तर से लेकर बूथ स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने की तैयारी के संकेत मिलते हैं।
पार्टी के लिए जिलाध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं और चुनावी गतिविधियों के बीच समन्वय का काम करते हैं। ऐसे में नए अध्यक्षों के सामने स्थानीय संगठन को सक्रिय रखने और आगामी चुनावी कार्यक्रमों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति पर जोर
भाजपा के ताजा बदलाव में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति सबसे प्रमुख बिंदुओं में से एक है। मंत्री बनने के बाद कई नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटाने का फैसला इसी सिद्धांत से जोड़ा गया है। इससे सरकार और पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों को अलग रखने की व्यवस्था बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल भाजपा में हुआ यह फेरबदल पार्टी के जिला संगठन, मोर्चों और राज्य कमेटी—तीनों स्तरों पर बदलाव लेकर आया है। आने वाले दिनों में नए पदाधिकारियों की गतिविधियां और निकाय चुनाव को लेकर उनकी भूमिका पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।




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