आसनसोल: पश्चिम बंगाल में सड़क, फुटपाथ, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और अवैध कब्जे को लेकर चल रहे अभियान के बीच नगर उन्नयन मंत्री अग्निमित्रा पाल का बड़ा बयान सामने आया है। आसनसोल में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले करीब 50 वर्षों के दौरान लोगों के बीच फुटपाथ के इस्तेमाल को लेकर कई ऐसी आदतें विकसित हुई हैं, जिन्हें अब बदलने की जरूरत है। उन्होंने फुटपाथ पर थूकने, गंदगी फैलाने, अवैध कब्जा करने और वहां वाहन खड़ा करने जैसी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहरों की व्यवस्था सुधारने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों की आदतों में भी बदलाव जरूरी है।
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि सड़क और फुटपाथ आम लोगों के आवागमन के लिए होते हैं। यदि फुटपाथ पर दुकान, सामान, वाहन या कचरा जमा हो जाए तो पैदल चलने वाले लोगों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। इससे यातायात और पैदल यात्रियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से शहरों में फुटपाथ को व्यवस्थित और उपयोग योग्य बनाने पर अभियान चलाया जा रहा है।
‘आदत बदलने की जरूरत’
अग्निमित्रा पाल ने बातचीत के दौरान कहा कि पिछले कई दशकों में फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों को लेकर लोगों में कुछ गलत आदतें बन गई हैं। उनके अनुसार, फुटपाथ पर थूकना, वहां गंदगी करना, रास्ते पर कब्जा करना या वाहन पार्क कर देना ऐसी गतिविधियां हैं, जिन्हें सामान्य मानने की प्रवृत्ति बदलनी होगी।
उन्होंने इस संदर्भ में पहले वाम मोर्चा और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय में लोगों के बीच इस तरह की आदतें विकसित हुई हैं। अब उनकी सरकार शहरों की व्यवस्था में सुधार लाने और सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य के विभिन्न शहरों में सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने और नागरिक अनुशासन को लेकर अभियान चल रहा है। हाल के दिनों में अग्निमित्रा पाल ने भी अलग-अलग इलाकों में निरीक्षण के दौरान फुटपाथ पर अवैध पार्किंग और निर्माण सामग्री रखे जाने को लेकर अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर अभियान का दावा
आसनसोल में चल रहे अभियान को लेकर अग्निमित्रा पाल ने कहा कि यह काम मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ परियोजनाओं पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है और उसी जिम्मेदारी के तहत वह अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्थिति देखने तथा आवश्यक कदम उठाने का प्रयास कर रही हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि अभियान के कारण सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया कि निर्धारित कार्यों को रोकने की बजाय शहरों की व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रहेगा।
हालांकि, हालिया रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक में अग्निमित्रा पाल सहित कुछ मंत्रियों को सड़क पर अत्यधिक सक्रियता के बजाय अपने विभागीय काम पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी थी। यह मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रियों के प्रशासनिक कामकाज को लेकर दिया गया निर्देश बताया गया है।
सड़क और फुटपाथ पर अभियान जारी रखने की बात
अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सरकारी परियोजनाओं के साथ-साथ सड़क और फुटपाथ से जुड़ी समस्याओं पर भी अभियान जारी रहेगा। उनके अनुसार, शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी जैसी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।
फुटपाथ पर कब्जे की समस्या केवल दुकानों या अस्थायी संरचनाओं तक सीमित नहीं होती। कई जगहों पर निजी वाहन, निर्माण सामग्री, कचरा या अन्य सामान भी पैदल चलने की जगह को घेर लेते हैं। ऐसे में फुटपाथ का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता है। मंत्री के बयान का मुख्य जोर इसी तरह के व्यवहार में बदलाव लाने पर है।
हाल के राज्यव्यापी स्वच्छता अभियान में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और कचरा फैलाने जैसे मामलों पर जुर्माने का प्रावधान भी लागू किया गया है। सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 100 रुपये और सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकने या गंदगी फैलाने पर 200 रुपये के जुर्माने की व्यवस्था की गई है। सार्वजनिक स्थान पर पेशाब या खुले में शौच तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक बैग से जुड़े कुछ उल्लंघनों पर भी 200 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
केवल कार्रवाई नहीं, नागरिक सहयोग भी जरूरी
शहर को साफ और व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी केवल नगर प्रशासन या पुलिस की नहीं होती। नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रशासन फुटपाथ खाली कराता है, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा वहां सामान या वाहन खड़े होने लगते हैं, तो समस्या फिर पैदा हो सकती है। इसी तरह कूड़ेदान और कचरा संग्रह की व्यवस्था होने के बावजूद यदि लोग सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकते हैं, तो स्वच्छता अभियान का उद्देश्य प्रभावित होता है।
अग्निमित्रा पाल के बयान में इसी व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिखाई देता है। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही आदतों को बदलना आसान नहीं होगा, लेकिन अभियान को लगातार जारी रखने और लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करने से स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।
आसनसोल में अभियान पर नजर
आसनसोल जैसे बड़े औद्योगिक शहर में सड़क और फुटपाथ का व्यवस्थित रहना यातायात तथा पैदल यात्रियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। शहर के बाजार क्षेत्रों और व्यस्त सड़कों पर फुटपाथ का उपयोग अलग-अलग गतिविधियों के लिए होने से पैदल चलने वालों के सामने परेशानी की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग को लेकर अभियान चलाए जाने की बात कही जा रही है।
अग्निमित्रा पाल ने साफ संकेत दिया है कि सड़क और फुटपाथ से जुड़ी समस्याओं को लेकर कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी। उनका जोर केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की आदतों में बदलाव लाने पर भी है।
फिलहाल मंत्री के इस बयान के बाद फुटपाथ, गंदगी और अवैध पार्किंग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। आने वाले दिनों में अभियान किस तरह आगे बढ़ता है और आसनसोल सहित राज्य के दूसरे शहरों में नागरिक नियमों के पालन को लेकर प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है, इस पर नजर रहेगी। साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ आम लोगों की भागीदारी कितनी बढ़ती है, यह भी इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी होगी।




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