आसनसोल: कहा जाता है कि किसी बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं होती, बल्कि एक मजबूत विचार और उसे पूरा करने के संकल्प से होती है। आसनसोल के नॉर्थ प्वाइंट स्कूल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 1999 में महज तीन शिक्षकों, कुछ बेंच और करीब 30 विद्यार्थियों से शुरू हुआ एक छोटा सा शैक्षणिक प्रयास आज करीब 3000 बच्चों तक पहुंच चुका है। नर्सरी से शुरू हुआ यह सफर अब कक्षा 12वीं तक पहुंच गया है।
इस पूरे सफर के पीछे स्कूल के कर्णधार सचिन राय और फाउंडर मीता राय की सोच और लगातार प्रयास की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिटी टुडे न्यूज़ के साथ खास बातचीत में मीता राय ने स्कूल की स्थापना से लेकर उसके विस्तार और शिक्षा के उद्देश्य से जुड़ी कई यादें साझा कीं।
एक इमारत को देखकर आया स्कूल का विचार
मीता राय ने बताया कि वर्ष 1999 में वह अपने पति सचिन राय के साथ पुरानी बिल्डिंग के पास से गुजर रही थीं। इसी दौरान सचिन राय ने उन्हें बताया कि वहां स्थित एक बिल्डिंग को खरीदने की बातचीत चल रही है।
इसी बातचीत के दौरान मीता राय के मन में विचार आया कि अगर यह बिल्डिंग मिल जाए तो यहां एक अच्छा स्कूल शुरू किया जा सकता है। उस समय शायद यह अंदाजा नहीं था कि एक साधारण सा विचार आने वाले वर्षों में हजारों बच्चों की शिक्षा से जुड़ी एक बड़ी यात्रा का आधार बनेगा।
इसी विचार के साथ नॉर्थ प्वाइंट स्कूल की नींव रखी गई और शिक्षा के क्षेत्र में एक नए सफर की शुरुआत हुई।
तीन शिक्षक और कुछ बेंच से हुई शुरुआत
स्कूल की शुरुआत आज के मुकाबले बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। मीता राय के अनुसार, शुरुआती दौर में केवल तीन शिक्षक थे और स्कूल में तीन-चार बेंच ही उपलब्ध थीं। पढ़ाई की शुरुआत नर्सरी स्तर से की गई थी।
उस समय सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को स्कूल तक लाना था। स्कूल की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए घर-घर जाकर संपर्क किया जाता था। शुरुआती दिनों में करीब 30 बच्चों ने स्कूल में दाखिला लिया। एक छोटे से संस्थान के लिए यह संख्या भले ही सीमित रही हो, लेकिन यही 30 विद्यार्थी आगे चलकर एक बड़े शैक्षणिक सफर की पहली सीढ़ी बने।
समय के साथ अभिभावकों का भरोसा बढ़ता गया और विद्यार्थियों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी। जो स्कूल कभी कुछ बेंच और तीन शिक्षकों के सहारे शुरू हुआ था, आज वहां करीब 3000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
नर्सरी से 12वीं तक पहुंचा शिक्षा का सफर
नॉर्थ प्वाइंट स्कूल में शुरुआत नर्सरी से हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे स्कूल में नई कक्षाओं को जोड़ा गया। पहले नर्सरी से कक्षा एक, फिर कक्षा दो से चार और आगे चलकर कक्षा आठ तक शिक्षा की व्यवस्था शुरू हुई।
समय के साथ संस्थान का विस्तार होता गया और आज स्कूल में कक्षा 12वीं तक पढ़ाई की व्यवस्था है। इस तरह करीब 27 वर्षों में संस्थान ने एक छोटे शैक्षणिक प्रयास से पूर्ण विद्यालय के रूप में अपनी पहचान बनाई।
मीता राय के अनुसार, स्कूल का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं है। शिक्षा के साथ बच्चों में अच्छे संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और बेहतर नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी संस्थान की सोच का हिस्सा है।
शिक्षा के साथ सामाजिक मूल्यों पर जोर
मीता राय का कहना है कि बच्चों को शिक्षा देने के साथ उन्हें समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराना भी शिक्षकों का नैतिक दायित्व है। इसी सोच के साथ स्कूल में पढ़ाई के अलावा सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारियों को भी महत्व देने का प्रयास किया जाता है।
उनके अनुसार, किसी विद्यार्थी की सफलता केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों से तय नहीं होती। एक जिम्मेदार, संवेदनशील और समाज के प्रति जागरूक नागरिक के रूप में उसका विकास भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यार्थियों की उपलब्धियों से बढ़ा संस्थान का गौरव
नॉर्थ प्वाइंट स्कूल से पढ़ाई करने वाले कई विद्यार्थियों ने अलग-अलग परीक्षाओं और क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर संस्थान का नाम रोशन किया है। मीता राय ने बताया कि एनआईआईटी जैसी परीक्षाओं में अव्वल रहने वाले कई विद्यार्थी भी स्कूल से जुड़े रहे हैं।
विद्यार्थियों की उपलब्धियों को स्कूल की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 30 विद्यार्थियों से शुरू हुआ सफर जब करीब 3000 विद्यार्थियों तक पहुंचा, तो इसके पीछे शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों के सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आसनसोल यूथ क्लब ने मीता राय को किया सम्मानित
इसी बीच गणेश पूजा के अवसर पर आसनसोल यूथ क्लब की ओर से नॉर्थ प्वाइंट स्कूल की फाउंडर मीता राय को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों और योगदान के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी गईं।
सम्मान के इस अवसर ने नॉर्थ प्वाइंट स्कूल की यात्रा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। चंदा मोड़ से शुरू हुआ यह शैक्षणिक सफर आज आसनसोल में एक बड़े शिक्षण संस्थान के रूप में सामने है।
एक विचार से शुरू हुई यह कहानी बताती है कि किसी संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारत या संसाधनों से नहीं बनती। उसके पीछे मौजूद सोच, मेहनत, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, विद्यार्थियों की मेहनत और अभिभावकों के विश्वास से उसकी पहचान मजबूत होती है। 1999 में 30 बच्चों से शुरू हुआ नॉर्थ प्वाइंट स्कूल आज करीब 3000 विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है और इसकी यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की कहानी बयां करती है।




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