आसनसोल: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब फुटबॉल भी एक नए राजनीतिक मुद्दे के तौर पर चर्चा में आ गया है। आसनसोल में भारतीय जनता पार्टी की नेता अग्निमित्रा पाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर खेल तथा विशेष रूप से फुटबॉल के विकास को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में खेलों के विकास के लिए जिस तरह की जमीनी तैयारी और सुविधाओं की जरूरत है, उस दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ। अग्निमित्रा पाल ने कहा कि केवल बड़े खिलाड़ियों को राज्य में बुलाने या फुटबॉल को राजनीतिक मंच पर चर्चा का विषय बनाने से बंगाल में खेल का वास्तविक विकास नहीं हो सकता।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। चुनाव आयोग के 18 सितंबर 2026 के फैसले के अनुसार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न पर उठे सवाल
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न चर्चा का विषय बन गया है। अग्निमित्रा पाल ने इसी मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि फुटबॉल बंगाल की भावनाओं और खेल संस्कृति से जुड़ा हुआ है तथा इसे राजनीतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय खेल के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अग्निमित्रा पाल के अनुसार, बंगाल में फुटबॉल की मजबूत परंपरा रही है और राज्य के अनेक युवा आज भी सीमित संसाधनों के बावजूद फुटबॉल में अपना भविष्य तलाशते हैं। ऐसे में खेल के वास्तविक विकास के लिए मैदान, प्रशिक्षण, प्रशिक्षक, क्लब व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में खेल के क्षेत्र में अपेक्षित स्तर का विकास नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने राज्य की राजनीति में हिंसा और टकराव के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा।
मेसी के बंगाल दौरे का भी किया जिक्र
अग्निमित्रा पाल ने अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के बंगाल दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को राज्य में बुलाने मात्र से फुटबॉल का विकास नहीं हो जाता। उनके मुताबिक, यदि सरकार वास्तव में खेल के विकास को प्राथमिकता देती है तो उसे स्थानीय और युवा खिलाड़ियों के लिए स्थायी सुविधाएं विकसित करनी चाहिए।
लियोनेल मेसी दिसंबर 2025 में कोलकाता पहुंचे थे। हालांकि साल्ट लेक स्टेडियम में उनके कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था और दर्शकों के विरोध की स्थिति पैदा हुई थी। बाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मेसी और प्रशंसकों से माफी मांगी थी तथा पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही थी।
इससे पहले मार्च 2025 में ममता बनर्जी ने मेसी की ओर से हस्ताक्षरित जर्सी मिलने की जानकारी साझा करते हुए बंगाल में फुटबॉल के प्रति अपने लगाव का उल्लेख किया था। उस समय पश्चिम बंगाल में फुटबॉल अकादमी स्थापित करने से जुड़े समझौते का भी उल्लेख सामने आया था।
‘खेल को राजनीति से अलग रखें’
अग्निमित्रा पाल ने ममता बनर्जी से फुटबॉल को राजनीति से अलग रखने की अपील की। उनका कहना था कि फुटबॉल केवल चुनावी प्रतीक या राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, मैदान में खेलने वाले बच्चों और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण तथा सुविधाएं मिलें, यही खेल के विकास की वास्तविक दिशा होनी चाहिए।
उनकी टिप्पणी को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि चुनाव आयोग के ताजा फैसले के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न मिला है। चुनाव आयोग ने इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। इसके बाद दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न चुनने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
बंगाल की राजनीति में फुटबॉल का भावनात्मक महत्व
पश्चिम बंगाल में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रहा है। कोलकाता और आसनसोल सहित राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय क्लबों और मैदानों से बड़ी संख्या में युवा जुड़े हुए हैं। मोहन बागान, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन स्पोर्टिंग जैसे क्लबों की लोकप्रियता ने बंगाल की फुटबॉल संस्कृति को अलग पहचान दी है।
ऐसे में फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न मिलने के बाद राजनीतिक बहस का खेल से जुड़ना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि खेल और राजनीति के इस मेल को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी व्याख्या है।
चुनावी माहौल में बयान से बढ़ी सियासी हलचल
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को नया नाम और चुनाव चिह्न मिलने के बाद राज्य की राजनीति में चुनावी गतिविधियां और तेज होने के संकेत हैं। चुनाव आयोग के फैसले के बाद दोनों गुटों की अलग-अलग राजनीतिक पहचान सामने आ गई है।
ऐसे में आसनसोल से अग्निमित्रा पाल का बयान राजनीतिक बहस को और धार देता दिखाई दे रहा है। एक तरफ फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की चुनावी पहचान का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेल को चुनावी राजनीति में प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच बहस किस दिशा में जाती है। अग्निमित्रा पाल के बयान के बाद यह मुद्दा आसनसोल से लेकर राज्य की राजनीति तक चर्चा में आ गया है।




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