Wednesday, 9 September 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
आसनसोल में शिक्षक दिवस का भव्य जश्न, पार्वती टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में छात्रों ने बांधा समां दुर्गापूजा से पहले बड़ी राहत! रूपनारायणपुर से प्राची जाने वाली सड़क का निर्माण शुरू कुल्टी में पानी के लिए सड़क पर उतरीं महिलाएं, 12 नंबर लोकल लाइन में सड़क जाम से मचा हड़कंप नेपाल त्रासदी में लापता भारतीयों की पहचान के लिए बड़ा कदम, परिवारों से डीएनए सैंपल देने की अपील मुख्यमंत्री की अपील का बड़ा असर! कोलकाता की 7 बड़ी पूजा कमिटियों ने ठुकराया ₹1 लाख अनुदान सड़ा मांस, फफूंद लगी मिठाई और प्रतिबंधित रंग! कोलकाता में 40 खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई आसनसोल में शिक्षक दिवस का भव्य जश्न, पार्वती टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में छात्रों ने बांधा समां दुर्गापूजा से पहले बड़ी राहत! रूपनारायणपुर से प्राची जाने वाली सड़क का निर्माण शुरू कुल्टी में पानी के लिए सड़क पर उतरीं महिलाएं, 12 नंबर लोकल लाइन में सड़क जाम से मचा हड़कंप नेपाल त्रासदी में लापता भारतीयों की पहचान के लिए बड़ा कदम, परिवारों से डीएनए सैंपल देने की अपील मुख्यमंत्री की अपील का बड़ा असर! कोलकाता की 7 बड़ी पूजा कमिटियों ने ठुकराया ₹1 लाख अनुदान सड़ा मांस, फफूंद लगी मिठाई और प्रतिबंधित रंग! कोलकाता में 40 खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई
बंगाल

मुख्यमंत्री की अपील का बड़ा असर! कोलकाता की 7 बड़ी पूजा कमिटियों ने ठुकराया ₹1 लाख अनुदान

Moutushi · 9 September 2026, 1:59 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा को लेकर राज्य सरकार की ओर से घोषित एक लाख रुपये के अनुदान पर अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अपील के अगले ही दिन कोलकाता की कई प्रमुख और बड़े बजट वाली दुर्गापूजा कमिटियों ने सरकारी आर्थिक सहायता नहीं लेने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम सात चर्चित पूजा कमिटियों ने अनुदान के लिए आवेदन नहीं करने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को दुर्गापूजा आयोजकों के साथ बैठक में स्पष्ट अपील की थी कि जिन पूजा कमिटियों के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं और जो अपने स्तर पर पूजा का आयोजन कर सकती हैं, वे सरकारी अनुदान न लें। उनका कहना था कि सरकारी सहायता का लाभ उन छोटी और आर्थिक रूप से कमजोर पूजा कमिटियों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इस राशि की जरूरत है।

अपील के बाद बड़ी कमिटियों का बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री की अपील के बाद मंगलवार को कोलकाता की कई प्रमुख पूजा कमिटियों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अनुदान नहीं लेने की घोषणा की। इनमें संतोष मित्र स्क्वायर, ताला प्रत्यय, सिंघी पार्क सार्वजनिक दुर्गोत्सव, नाकतला उदयन संघ, चोरबागान सार्वजनिक, संतोषपुर लेकपल्ली और राजडांगा नबा उदय संघ के नाम सामने आए हैं।

संतोषपुर लेकपल्ली की ओर से मुख्यमंत्री की घोषणा के लिए धन्यवाद देते हुए कहा गया कि समिति सरकारी सहायता स्वीकार नहीं करेगी। वहीं संतोष मित्र स्क्वायर से जुड़े भाजपा विधायक और पूजा आयोजक सजल घोष ने भी कहा कि उनकी पूजा समिति पहले भी सरकारी आर्थिक सहायता नहीं लेती थी और इस वर्ष भी इसी नीति को जारी रखा जाएगा।

राजडांगा नबा उदय संघ ने लिया अलग फैसला

इन सात कमिटियों में राजडांगा नबा उदय संघ का फैसला सबसे अलग रहा। समिति ने पूजा के लिए सरकारी एक लाख रुपये का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, समिति इस राशि को मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला कर चुकी है। समिति की अध्यक्ष और भाजपा की राज्य प्रवक्ता केया घोष ने इसकी जानकारी दी।

इस फैसले को मुख्यमंत्री की अपील के प्रति समर्थन के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की मदद की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार ने क्यों की बड़ी पूजा कमिटियों से अपील?

दरअसल, इस वर्ष राज्य सरकार ने दुर्गापूजा कमिटियों के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। पिछले वर्ष यह सहायता राशि एक लाख दस हजार रुपये थी। इस बार सरकार ने सहायता राशि कम करके एक लाख रुपये की है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त जैसी अपील भी रखी है कि आर्थिक रूप से सक्षम और बड़े बजट वाली पूजा कमिटियां स्वेच्छा से इस सहायता से दूर रहें।

सरकार का उद्देश्य बताया गया है कि सीमित सरकारी संसाधनों का लाभ उन पूजा आयोजकों तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में आर्थिक सहायता की जरूरत है। छोटी पूजा कमिटियों के लिए एक लाख रुपये की राशि आयोजन के दौरान काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सरकारी व्यवस्था के अनुसार, सहायता की जरूरत रखने वाली पूजा कमिटियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर आवेदनों की जांच के बाद सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बिजली बिल में 100 प्रतिशत छूट

दुर्गापूजा आयोजकों के लिए सरकार ने केवल अनुदान की घोषणा नहीं की है। इस वर्ष पूजा कमिटियों को बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट देने की भी घोषणा की गई है। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा अनुमति से संबंधित शुल्क में भी राहत देने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई है।

बिजली बिल में पूरी छूट की घोषणा के बाद कई पूजा कमिटियों ने सरकार के प्रति आभार जताया है। आयोजकों का कहना है कि पूजा के दौरान पंडाल, रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं में बिजली का खर्च काफी बढ़ जाता है। ऐसे में बिजली शुल्क में पूरी राहत मिलने से पूजा आयोजन का आर्थिक दबाव कम हो सकता है।

कुछ कमिटियां अनुदान के पक्ष में भी

जहां एक ओर बड़े बजट वाली कई पूजा कमिटियों ने सरकारी सहायता से दूरी बनाने का फैसला किया है, वहीं कुछ पूजा आयोजकों ने सरकार के एक लाख रुपये के अनुदान का स्वागत भी किया है। उनका कहना है कि सभी पूजा समितियां आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

कई छोटे इलाकों में स्थानीय चंदे और सीमित संसाधनों के सहारे दुर्गापूजा आयोजित की जाती है। ऐसे में सरकारी सहायता मिलने से पंडाल, प्रतिमा, बिजली, सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का खर्च संभालने में मदद मिल सकती है। आयोजकों का यह भी कहना है कि आर्थिक परेशानी के कारण कुछ स्थानों पर पूजा आयोजन प्रभावित होने की स्थिति बन जाती है।

अनुदान पर शुरू हुई नई बहस

सरकार के इस फैसले और बड़ी पूजा कमिटियों के अनुदान छोड़ने के निर्णय ने दुर्गापूजा के आर्थिक मॉडल को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। एक तरफ बड़े और लोकप्रिय पूजा आयोजनों के पास प्रायोजकों तथा चंदे से पर्याप्त धन जुटाने की क्षमता होती है, वहीं दूसरी तरफ छोटे इलाकों की पूजा कमिटियां सरकारी सहायता पर अधिक निर्भर हो सकती हैं।

ऐसे में बड़ी कमिटियों का अनुदान छोड़ना सरकार की उस अपील को मजबूती देता दिखाई दे रहा है, जिसमें जरूरतमंद पूजा आयोजकों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। आने वाले दिनों में और कितनी पूजा कमिटियां इस पहल से जुड़ती हैं, इस पर भी नजर रहेगी।

कुल मिलाकर, दुर्गापूजा 2026 में इस बार केवल पंडाल, प्रतिमा और सांस्कृतिक आयोजनों की चर्चा नहीं है, बल्कि सरकारी सहायता को लेकर भी एक नया संदेश सामने आया है। मुख्यमंत्री की अपील के बाद बड़ी पूजा कमिटियों द्वारा एक लाख रुपये का अनुदान छोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं, छोटी और आर्थिक रूप से कमजोर पूजा कमिटियों के लिए सरकारी सहायता जारी रहने से उम्मीद है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद राज्यभर में दुर्गापूजा का आयोजन व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

Advertisement