Sunday, 6 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में बीजेपी के कथित वायरल पत्र से सियासी भूचाल, कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल; विधायक बोले- पूरी तरह फर्जी

Moutushi · 6 September 2026, 4:07 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भारतीय जनता पार्टी के नाम से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित पत्र को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पत्र को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक कृषनेन्दु मुखर्जी ने पूरे पत्र को फर्जी बताते हुए इसे पार्टी और बीजेपी के एक मंडल अध्यक्ष को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। इस पूरे विवाद के बाद अब सवाल उठने लगा है कि आखिर वायरल पत्र की वास्तविकता क्या है और इसे तैयार किसने किया?

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कथित पत्र

विवाद के केंद्र में एक कथित पत्र है, जो आसनसोल सांगठनिक जिला बीजेपी के दक्षिण मंडल-1 के अध्यक्ष सोमनाथ मंडल के नाम और लेटरहेड से जारी होने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र में थाना और अस्पताल से संबंधित संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति तथा बाद में उनकी जिम्मेदारियां वापस लिए जाने की बात कही गई है।

बताया जा रहा है कि कथित सूचना 5 सितंबर 2026 को जारी की गई थी। इसमें दावा किया गया कि थाना और अस्पताल से संबंधित जिन व्यक्तियों के नाम तथा जिम्मेदारियों की पहले घोषणा की गई थी, उस घोषणा को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि पहले जिम्मेदारी पाने वाले कार्यकर्ता अब संबंधित थाना अथवा अस्पताल के साथ संगठन की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में काम नहीं करेंगे।

पत्र पर मुहर और अन्य औपचारिक विवरण दिखाई देने के कारण सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा और तेज हो गई। हालांकि, पत्र की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

पहले प्रतिनिधियों की नियुक्ति का दावा

इससे पहले सामने आई कथित नियुक्ति संबंधी सूचनाओं में आसनसोल दक्षिण मंडल-1 की ओर से अलग-अलग पुलिस इकाइयों के लिए बीजेपी प्रतिनिधियों के नाम बताए गए थे।

कथित सूची के अनुसार, आसनसोल दक्षिण पुलिस चौकी के लिए उत्तम कर्मकार, अनूप सिंह और राहुल रॉय के नाम सामने आए थे। वहीं हीरापुर थाना से संबंधित प्रतिनिधियों के तौर पर अरुण बौरी, काजल चक्रवर्ती और रहित केउरा के नाम बताए गए थे।

कथित सूचना में दावा किया गया था कि ये प्रतिनिधि संबंधित पुलिस इकाइयों के साथ आवश्यक संवाद और समन्वय करेंगे तथा मंडल क्षेत्र के लोगों की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके बाद जब कथित तौर पर इन जिम्मेदारियों को वापस लेने वाला पत्र सामने आया, तो राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया।

कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता प्रसंजीत पोइतूंडी ने वायरल पत्र को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी राजनीतिक दल के मंडल अध्यक्ष को थाना चलाने या पुलिस की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया है।

प्रसंजीत पोइतूंडी ने आरोप लगाया कि क्या बीजेपी स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि हाल के राजनीतिक बदलाव के बाद पुलिस पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है और आरोप लगाया कि पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस की जर्सी उतारकर बीजेपी का गमछा पहन लिया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी संविधान और नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से बीजेपी के कुछ लोग उन पर प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अस्पतालों में प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल

कांग्रेस नेता ने अस्पतालों से जुड़े कथित प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि मरीजों की समस्याएं उठाना, रक्त की व्यवस्था में मदद करना, ऑपरेशन की जरूरत या डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को सामने रखना आम नागरिकों का अधिकार है।

उनके अनुसार, इसके लिए किसी व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल के झंडे या पहचान के साथ विशेष अधिकार देने की आवश्यकता नहीं है। आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर थाने जा सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए अस्पताल प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।

प्रसंजीत पोइतूंडी ने कहा कि इससे पहले वामपंथी शासन और लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस की सरकार के दौरान ऐसी व्यवस्था देखने को नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

कथित वसूली और ‘साइफनिंग’ का भी जिक्र

बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता ने कथित ‘साइफनिंग’ और वसूली से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कुछ लोगों के नाम लेते हुए बीजेपी नेतृत्व से सवाल किया कि ऊपर से जिम्मेदारी मिलने का कथित दावा आखिर किस आधार पर किया गया था।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर भी कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों को फिलहाल राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

बीजेपी विधायक ने बताया पूरी तरह फर्जी

वहीं, आसनसोल उत्तर के बीजेपी विधायक कृषनेन्दु मुखर्जी ने वायरल पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि वह दक्षिण मंडल-1 के अध्यक्ष सोमनाथ मंडल को करीब से जानते हैं और उनके अनुसार सोमनाथ मंडल इस तरह का कोई काम नहीं कर सकते।

कृषनेन्दु मुखर्जी ने आरोप लगाया कि किसी ने सोमनाथ मंडल के नाम और पद का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी पत्र तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य एक मेहनती बीजेपी कार्यकर्ता को बदनाम करना और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

बीजेपी विधायक ने स्पष्ट किया कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों को न तो बढ़ावा देती है और न ही ऐसी किसी व्यवस्था का समर्थन करती है। उन्होंने संकेत दिया कि सोशल मीडिया पर पार्टी के नाम से फर्जी सामग्री प्रसारित कर राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल- असली पत्र कौन सा?

इस पूरे विवाद के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल पत्र की सच्चाई क्या है। क्या यह वास्तव में बीजेपी का आधिकारिक दस्तावेज है या फिर बीजेपी मंडल अध्यक्ष के नाम और लेटरहेड का कथित तौर पर दुरुपयोग करके इसे तैयार किया गया?

पत्र पर मौजूद मुहर, हस्ताक्षर और जारी करने के अधिकार की वास्तविकता की जांच होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। यदि पत्र फर्जी साबित होता है, तो इसे तैयार करने और प्रसारित करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ सकती है। वहीं, यदि यह आधिकारिक दस्तावेज पाया जाता है, तो थाना और अस्पताल से जुड़े कथित प्रतिनिधियों की नियुक्ति तथा उनकी भूमिका को लेकर गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल आसनसोल की राजनीति में यह वायरल पत्र चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कांग्रेस जहां इसे लेकर बीजेपी को घेर रही है, वहीं बीजेपी इसे फर्जी बताते हुए पार्टी और अपने कार्यकर्ता को बदनाम करने की साजिश बता रही है। अब निगाह इस बात पर है कि वायरल दस्तावेज की वास्तविकता कब सामने आती है और इस विवाद पर आगे क्या राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाया जाता है।

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