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आसनसोल-दुर्गापुर

40 साल पुराने जमीन विवाद में बड़ा फैसला, कोर्ट के आदेश के बाद मालिक को मिली जमीन वापस

Moutushi · 31 August 2026, 4:45 PM

आसनसोल: आसनसोल में करीब चार दशक पुराने जमीन विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई और विभिन्न स्तरों पर हुई कार्रवाई के बाद जमीन मालिक को कोर्ट के आदेश के आधार पर जमीन वापस मिलने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले को लेकर आसनसोल निवासी संजय अग्रवाल ने घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, विवादित जमीन पर वर्षों पहले भारत टिंबर के नाम से काठ गोला संचालित होता था और इसी जमीन को लेकर बाद में मालिकाना हक, दस्तावेज, किराया, बैंक लोन और रजिस्ट्री से जुड़ा विवाद खड़ा हो गया।

संजय अग्रवाल के मुताबिक, वे लोग उक्त जमीन के लैंडलॉर्ड थे और वहां कारोबार संचालित करने वाले रोशनलाल सेठी से किराया लिया करते थे। उनके अनुसार, कुछ वर्षों तक किराया दिए जाने के बाद उन्हें कथित तौर पर जानकारी मिली कि जमीन को लेकर दस्तावेजों में ऐसी स्थिति तैयार कर दी गई, जिसमें जमीन पर जबरन कब्जे का दावा दिखाई देने लगा। संजय अग्रवाल का आरोप है कि इस प्रक्रिया में तत्कालीन भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्यालय से भी कथित तौर पर मिलीभगत की गई थी।

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब संजय अग्रवाल को कथित तौर पर पता चला कि विवादित जमीन को रोशनलाल सेठी ने अपने दोनों बेटों के नाम उपहार के रूप में हस्तांतरित कर दिया है। जमीन से जुड़े दस्तावेज और लेनदेन की जानकारी सामने आने के बाद संजय अग्रवाल ने कानूनी रास्ता अपनाया। उन्होंने जमीन से संबंधित डीड और लाइसेंस को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

जमीन के आधार पर बैंक से डेढ़ करोड़ रुपये के लोन का दावा

संजय अग्रवाल के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली। उनका दावा है कि विवादित जमीन के आधार पर यूको बैंक से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद के बीच बैंक से जुड़े इस मामले ने पूरे प्रकरण को और जटिल बना दिया।

उनके अनुसार, इसके बाद यूको बैंक की ओर से भी मामले में कार्रवाई शुरू की गई। संजय अग्रवाल ने बैंक के खिलाफ भी अदालत में मामला दायर किया। लंबे समय तक चले इस कानूनी विवाद में जमीन के दस्तावेजों के साथ-साथ उसके आधार पर किए गए वित्तीय लेनदेन भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बने।

संजय अग्रवाल का कहना है कि इस मामले में उन्हें अदालत से राहत मिली और इसके बाद यूको बैंक ने संबंधित स्थान को छोड़ दिया। हालांकि, इसके बाद भी जमीन का विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और एक नया मोड़ सामने आया।

एक और व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री का दावा

संजय अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद रोशनलाल सेठी की ओर से कथित तौर पर उसी जमीन की रजिस्ट्री इम्तियाज नामक व्यक्ति के नाम कर दी गई। उनका कहना है कि उस समय तक यह मामला अदालत में विचाराधीन था और रोशनलाल सेठी तथा उनके दोनों बेटों के खिलाफ अदालत की ओर से स्थायी निषेधाज्ञा भी लगी हुई थी।

यही वजह रही कि जमीन को लेकर कानूनी विवाद और लंबा खिंच गया। एक ओर जमीन के मालिकाना हक को लेकर दावे किए जा रहे थे, तो दूसरी ओर अलग-अलग दस्तावेजों और रजिस्ट्री को लेकर भी सवाल उठते रहे। संजय अग्रवाल के अनुसार, उन्होंने इन घटनाक्रमों के खिलाफ भी कानूनी लड़ाई जारी रखी।

चार दशक बाद मिली राहत

करीब 40 साल पुराने इस विवाद में लगातार चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट के आदेश के आधार पर जमीन वापस मिलने की बात सामने आई है। संजय अग्रवाल ने इसे लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी राहत बताया है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक अदालतों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार उन्हें अपनी जमीन पर अधिकार वापस मिलने से राहत मिली है।

इस पूरे मामले ने यह भी दिखाया कि जमीन से जुड़े विवाद किस तरह कई दशकों तक कानूनी प्रक्रिया में उलझे रह सकते हैं। स्वामित्व के दस्तावेज, भूमि रिकॉर्ड, किरायेदारी, रजिस्ट्री और बैंक ऋण जैसे अलग-अलग पहलू किसी भी संपत्ति विवाद को जटिल बना सकते हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की वैधता और अदालत के आदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, मामले में लगाए गए विभिन्न आरोप और दावे संबंधित पक्ष के बयानों पर आधारित हैं। जमीन के दस्तावेजों और पूरे घटनाक्रम की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट मानी जाएगी।

फिलहाल, करीब चार दशक पुराने इस विवाद में कोर्ट के आदेश के बाद जमीन मालिक को राहत मिलने की खबर से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। संजय अग्रवाल ने लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जमीन वापस मिलने पर राहत जताई है। वहीं, इतने पुराने संपत्ति विवाद का यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि जमीन से जुड़े अधिकारों और दस्तावेजों को लेकर किसी भी विवाद का समाधान अंततः कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।

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