Wednesday, 26 August 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में जमीन कब्जे के आरोप पर बवाल, भाजपा नेत्री के खिलाफ सड़क पर उतरे स्थानीय लोग

Moutushi · 26 August 2026, 4:41 PM

आसनसोल: जमीन पर कब्जे के आरोप को लेकर आसनसोल में बुधवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय लोगों ने भाजपा की आसनसोल सांगठनिक जिला महासचिव काकली घोष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला आसनसोल के हीरापुर थाना क्षेत्र के इस्माइल स्थित सहयोगी नगर इलाके का बताया जा रहा है। मंदिर के सामने मौजूद जमीन को लेकर स्थानीय लोगों और भाजपा नेत्री के बीच विवाद बढ़ने के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। देखते ही देखते मामला बहस से विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद हीरापुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी के बाद इलाके में स्थिति को संभाला गया। वहीं, स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जानकारी फोन के माध्यम से आसनसोल दक्षिण की विधायक और राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल को भी दी।

मंदिर के सामने जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद

स्थानीय लोगों के अनुसार, सहयोगी नगर इलाके में मंदिर के सामने एक जमीन मौजूद है। लोगों का दावा है कि यह जमीन एक निजी व्यक्ति की है और संबंधित व्यक्ति ने जमीन मंदिर कमेटी को दे दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी।

जैसे ही स्थानीय लोगों को कथित जमीन कब्जे की जानकारी मिली, इलाके में लोगों की भीड़ जुटने लगी। लोगों ने मामले को लेकर आपत्ति जताई और मौके पर मौजूद भाजपा नेत्री काकली घोष से सवाल-जवाब शुरू किया।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगी। मामला बढ़ने पर स्थानीय लोगों ने काकली घोष को घेरकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई।

स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन में शामिल स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर के सामने की जमीन को लेकर जिस तरह की गतिविधि हुई, वह स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि जमीन मंदिर कमेटी को दिए जाने के बाद वहां किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस पूरे मामले के पीछे भाजपा की आसनसोल सांगठनिक जिला महासचिव काकली घोष का हाथ है। हालांकि, यह आरोप फिलहाल स्थानीय लोगों के दावे पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

लोगों ने मांग की कि जमीन के स्वामित्व और उसके इस्तेमाल से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि जमीन वास्तव में मंदिर कमेटी को दी गई है, तो उसके इस्तेमाल को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होना चाहिए।

मौके पर पहुंची पुलिस, संभाली स्थिति

विवाद बढ़ने और स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद हीरापुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी महत्वपूर्ण रही। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को आगे बढ़ने से रोका गया। हालांकि, जमीन को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी बनी रही।

पुलिस की ओर से पूरे मामले की जांच किए जाने की बात सामने आई है। जमीन के वास्तविक स्वामित्व, मंदिर कमेटी को जमीन दिए जाने के दावे और कथित कब्जे के आरोपों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अग्निमित्रा पाल को फोन पर दी गई जानकारी

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी आसनसोल दक्षिण की विधायक और राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल को फोन के माध्यम से दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने मंत्री को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए जमीन से जुड़े विवाद के बारे में बताया। लोगों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जमीन को लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा नेत्री के खिलाफ स्थानीय लोगों के प्रदर्शन ने इलाके में राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

काकली घोष ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, भाजपा की आसनसोल सांगठनिक जिला महासचिव काकली घोष ने अपने ऊपर लगाए गए जमीन कब्जे के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोपों को गलत बताया है।

काकली घोष के रुख के बाद अब मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच पहुंच गया है। एक तरफ स्थानीय लोग जमीन कब्जे की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं, वहीं भाजपा नेत्री इन आरोपों को नकार रही हैं।

ऐसे में अब पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर जमीन से जुड़े दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू

जमीन विवाद के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा नेत्री के खिलाफ स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के कारण मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि जमीन के इस्तेमाल और कथित कब्जे की कोशिश के खिलाफ है। वहीं, भाजपा की ओर से मामले को अलग नजरिए से देखे जाने की संभावना है।

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाके में शांति बनाए रखने के साथ-साथ विवाद की वास्तविक वजह का पता लगाना है। जमीन के कागजात, संबंधित पक्षों के बयान और मंदिर कमेटी से जुड़ी जानकारी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

दस्तावेजों की जांच से साफ होगी जमीन की सच्चाई

इस विवाद में सबसे अहम सवाल जमीन के स्वामित्व और उसके इस्तेमाल को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन एक निजी व्यक्ति की है और उसे मंदिर कमेटी को दिया गया है। यदि ऐसा है, तो इससे संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

वहीं, भाजपा नेत्री द्वारा आरोपों से इनकार किए जाने के बाद मामले में दोनों पक्षों के दावों की जांच आवश्यक हो गई है। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

हीरापुर थाना क्षेत्र के सहयोगी नगर में जमीन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद तत्काल स्थिति नियंत्रित हो गई, लेकिन स्थानीय लोगों की नाराजगी और आरोपों के कारण मामले पर आगे भी नजर बनी रहेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में जमीन को लेकर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और क्या दोनों पक्षों के बीच विवाद का कोई समाधान निकल पाता है।

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