मदन मित्र ने माँ कल्याणेश्वरी के दरबार में टेका माथा, राज्य की शांति के लिए मांगी शक्ति

कल्याणेश्वरी: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्र ने प्रसिद्ध माँ कल्याणेश्वरी मंदिर में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और राज्य की शांति व समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कई अहम राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी दिए।

🙏 माँ के दरबार में मांगी शांति और सौहार्द

मदन मित्र ने कहा कि माँ कल्याणेश्वरी का मंदिर आस्था और मनोकामना पूर्ति का पवित्र स्थान है। उन्होंने बताया कि वे कोलकाता से विशेष रूप से माँ का आशीर्वाद लेने आए हैं और पूरे पश्चिम बंगाल में शांति, सौहार्द और भाईचारे की कामना की है।

मंदिर परिसर में उनके पहुंचते ही समर्थकों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

🗣️ “लोकतंत्र के लिए विपक्ष जरूरी” – मदन मित्र

अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले मदन मित्र ने इस दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा:
“जैसे मंदिर में माँ के साथ भक्तों का होना जरूरी है, वैसे ही लोकतंत्र में सरकार के साथ विपक्ष का होना भी उतना ही जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने माँ से नई सरकार को शक्ति और सफलता देने के साथ-साथ विपक्ष को भी मजबूत और सक्रिय बनाए रखने की प्रार्थना की है। उनका मानना है कि एक मजबूत विपक्ष लोकतंत्र को संतुलित और प्रभावी बनाता है।

⚠️ हिंसा पर चिंता, जल्द सुधार की उम्मीद

राज्य में हालिया राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मदन मित्र ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता शांति पसंद करती है और अशांति को स्वीकार नहीं करती।

उन्होंने विश्वास जताया कि माँ कल्याणेश्वरी के आशीर्वाद से आने वाले एक से दो महीने के भीतर राज्य की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा और हर तरफ शांति का वातावरण बनेगा।

🤝 एकता और सम्मान का संदेश

अपने बयान के अंत में मदन मित्र ने कहा कि राज्य में हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए और सभी को साथ लेकर चलना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।

“जब हर वर्ग को बराबरी का अधिकार मिलेगा, तभी असली लोकतंत्र स्थापित होगा,” उन्होंने कहा।

इसके बाद “जय माँ कल्याणेश्वरी” के जयकारे के साथ वह कोलकाता के लिए रवाना हो गए।

👉 निष्कर्ष:
मदन मित्र का यह दौरा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी बन गया है—जहां आस्था के साथ-साथ लोकतंत्र, शांति और एकता की बात प्रमुखता से सामने आई।

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