बिहार में निवेश को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उद्योगपति महेंद्र शर्मा की अहम मुलाकात, 500 एकड़ में ₹6,000 करोड़ के निवेश को मिली मंजूरी

पटना। बिहार में औद्योगिक विकास, नए निवेश और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से 6 अगस्त को पटना स्थित संकल्प लोक सेवा आयोग परिसर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विभिन्न उद्योगपतियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में नए उद्योगों की स्थापना, औद्योगिक निवेश बढ़ाने और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने को लेकर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करना था।


बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र धरातल पर उतारने, उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा निवेशकों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग मिशन मोड में कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल एमओयू तक सीमित रहने के बजाय परियोजनाओं को तेजी से लागू करना सरकार की प्राथमिकता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में स्टील, टेक्सटाइल, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने Bihar Business Connect 2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से देश-विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों और निवेशकों को बिहार में उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने “Build and Believe in Bihar” को राज्य के औद्योगिक विकास का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि विशाल बाजार, युवा मानव संसाधन और बेहतर आधारभूत संरचना के बल पर बिहार को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य है।


इस बैठक में पश्चिम बंगाल के आसनसोल के उद्योगपति महेंद्र शर्मा और उनके भाई सुरेंद्र शर्मा भी विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने बिहार में औद्योगिक निवेश से जुड़े अपने प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे, जिन पर बिहार सरकार ने सकारात्मक निर्णय लेते हुए कई प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की।


महेंद्र शर्मा ने बिहार में लगभग 500 एकड़ भूमि पर करीब ₹6,000 करोड़ के निवेश की योजना प्रस्तुत की, जिसे बिहार सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना के तहत बड़े स्तर पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिससे हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बैठक के बाद संकेत मिले कि महेंद्र शर्मा अपने स्टील कारोबार अंकुर स्टील के विस्तार के लिए बिहार को एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।


महेंद्र शर्मा के औद्योगिक सफर की शुरुआत गुजरात में अंकुर नमक के कारोबार से हुई थी। इसके बाद उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज कई उद्योगों में मजबूत पहचान बना चुके हैं। वर्तमान में झारखंड के मुगमा में उनका शराब निर्माण कारखाना संचालित है, जबकि पश्चिम बंगाल के कालिदासपुर में भी उनकी कंपनी का शराब उत्पादन संयंत्र कार्यरत है। बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल के शराब कारोबार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा उनकी कंपनी के माध्यम से संचालित होता है।


इसके अलावा बिहार के चकाई में उन्होंने एथेनॉल उत्पादन संयंत्र भी स्थापित किया है। केंद्र और बिहार सरकार दोनों ही एथेनॉल क्षेत्र में निवेश और विस्तार पर विशेष जोर दे रही हैं, ऐसे में इस क्षेत्र में उनकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके विभिन्न उद्योगों के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिल रहा है।
आसनसोल के लिए भी यह गर्व का विषय माना जा रहा है कि देशभर में अपने औद्योगिक कारोबार का विस्तार करने वाले महेंद्र शर्मा का निवास पश्चिम बंगाल के आसनसोल में है। स्थानीय स्तर पर उन्हें ऐसे उद्योगपति के रूप में देखा जाता है जिन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत कर अपने व्यवसाय को लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अब बिहार सहित देश के कई राज्यों में बड़े निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव भी उपस्थित रहे।


बिहार सरकार का मानना है कि उद्योगपतियों के साथ हुई इस बैठक और स्वीकृत निवेश प्रस्तावों से राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा तथा बिहार को एक प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

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