आसनसोल:
महान समाज सुधारक संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर आसनसोल में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शनिवार को मां घाघरबूड़ी मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
🛕 आस्था और उत्साह का माहौल
पूरे मंदिर परिसर में भक्ति गीतों, भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने संत रविदास के उपदेशों को याद करते हुए सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दिया।
🚩 कलश यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन की खास बात रही भव्य कलश यात्रा, जिसमें अरिजीत राय सिर पर कलश लेकर शामिल हुए। उनके साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी शोभायात्रा में भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
👥 प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
कार्यक्रम में देवतनु भट्टाचार्य, जितेंद्र तिवारी सहित कई भाजपा नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने संत रविदास के विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
🪔 वाराणसी से आई पवित्र मिट्टी
इस मौके पर बताया गया कि वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से एक कलश में पवित्र मिट्टी लाई गई है, जो शुक्रवार को आसनसोल पहुंची। इस मिट्टी को श्रद्धा के साथ पूरे पश्चिम बंगाल में ले जाया जाएगा।
📅 2027 तक चलेगा अभियान
देवतनु भट्टाचार्य ने जानकारी दी कि यह विशेष धार्मिक अभियान 20 फरवरी 2027 तक चलेगा।
👉 पवित्र मिट्टी को राज्य के हर जिले, ब्लॉक और बूथ स्तर तक पहुंचाया जाएगा
👉 लोगों को संत रविदास के जीवन, विचार और समाज सुधार के कार्यों से अवगत कराया जाएगा
🌟 संत रविदास का संदेश
संत रविदास ने अपने जीवन में समानता, भाईचारा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उनका मानना था कि समाज में सभी लोग बराबर हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
🗣️ निष्कर्ष
आसनसोल में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और जागरूकता का बड़ा संदेश भी है।
👉 संत रविदास की 650वीं जयंती के बहाने लोगों को उनके विचारों से जोड़ने की कोशिश
👉 पूरे पश्चिम बंगाल में एक व्यापक जनजागरण अभियान की शुरुआत
इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि आज भी संत रविदास के विचार समाज को जोड़ने और आगे बढ़ाने में उतने ही प्रासंगिक हैं।

