आसनसोल के छात्रों का अनोखा ग्रीन मिशन—ट्रेन से फेंके जाएंगे ‘सीड बॉल’, हरियाली की नई पहल

आसनसोल:
देशभर में चल रहे वृक्षारोपण अभियान के बीच पश्चिम बर्धमान के आसनसोल से एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। यहां के कई स्कूलों के छात्रों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई सोच के साथ ‘सीड बॉल अभियान’ की शुरुआत की है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।

🌱 क्या है ‘सीड बॉल’ पहल?

इस पहल के तहत छात्रों ने विभिन्न प्रकार के पेड़ों के बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के साथ मिलाकर छोटे-छोटे गोलों (सीड बॉल) का रूप दिया है।

इन सीड बॉल को आसनसोल से बर्दवान और आसनसोल से धनबाद रेल मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों से रेलवे लाइन के किनारे फेंका जाएगा।
बारिश और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने पर ये बीज अंकुरित होकर पेड़ों में बदल जाएंगे, जिससे रेलवे ट्रैक के दोनों ओर हरियाली बढ़ेगी।

🚆 ट्रेन से होगा हरियाली का विस्तार

इस अनोखी पहल की खास बात यह है कि ट्रेन के जरिए बड़े क्षेत्र में पौधारोपण संभव होगा, जहां सामान्य तरीके से पेड़ लगाना मुश्किल होता है।

इस जिम्मेदारी को एक स्वयंसेवी संस्था ने अपने हाथ में लिया है, जो इन सीड बॉल को निर्धारित स्थानों पर फेंकने का काम करेगी।

🎓 ननीगोपाल स्कूल में हुआ कार्यक्रम

इस अभियान के तहत आसनसोल के ननीगोपाल स्कूल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

🗣️ मंत्री अग्निमित्रा पाल ने की सराहना

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने छात्रों की इस अनोखी पहल की जमकर सराहना की।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी की ऐसी पहलें समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और इससे पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के प्रयास लगातार जारी रहे, तो आने वाले समय में आसनसोल एक हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता है।

🌍 पर्यावरण संरक्षण की ओर बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि सीड बॉल तकनीक सूखे और कठिन क्षेत्रों में भी पौधारोपण का प्रभावी तरीका है।
यह न केवल हरियाली बढ़ाता है, बल्कि जैव विविधता को भी मजबूत करता है।

✨ क्यों खास है यह पहल?

  • कम लागत में बड़े स्तर पर पौधारोपण
  • कठिन क्षेत्रों में भी संभव
  • छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता
  • रेलवे ट्रैक के किनारे हरियाली का विस्तार

👉 कुल मिलाकर, आसनसोल के छात्रों की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

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