आसनसोल (पश्चिम बर्दवान): आसनसोल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस कार्रवाई के खिलाफ माकपा (सीपीएम) ने शहर में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की।
🚨 सड़क पर उतरी सीपीएम
👉 अतिक्रमण हटाने के विरोध में—
✔️ सीपीएम कार्यकर्ताओं ने विशाल जुलूस निकाला
✔️ शहर के प्रमुख इलाकों में मार्च करते हुए प्रदर्शन किया
👉 प्रदर्शन के दौरान—
👉 “हॉकरों को न्याय दो”
👉 “पहले पुनर्वास, फिर अतिक्रमण हटाओ” जैसे नारे लगाए गए
🗣️ पार्थ चटर्जी का बयान
सीपीएम नेता पार्थ चटर्जी ने कहा—
👉 “शहर का विकास जरूरी है, लेकिन गरीबों की कीमत पर नहीं”
👉 “वर्षों से व्यापार कर रहे हॉकरों और दुकानदारों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता”
👉 उन्होंने जोर देकर कहा—
👉 अतिक्रमण हटाने से पहले—
✔️ प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए
✔️ उनके लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था की जाए
📉 हॉकरों की बढ़ी चिंता
👉 इस अभियान के चलते—
✔️ सैकड़ों छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है
✔️ कई परिवार आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं
👉 स्थानीय व्यापारियों का कहना है—
👉 “बिना तैयारी के कार्रवाई से हम पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं”
⚖️ विकास बनाम आजीविका
👉 आसनसोल में अब यह मुद्दा—
👉 “विकास बनाम आजीविका” की बहस बन गया है
👉 एक ओर प्रशासन शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाना चाहता है
👉 वहीं दूसरी ओर गरीब हॉकर अपने रोजगार को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं
📊 बढ़ता राजनीतिक तनाव
👉 इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ रही है
👉 शहर का माहौल धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है
✨ निष्कर्ष
आसनसोल का अतिक्रमण हटाओ अभियान—
👉 अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है
👉 सीपीएम के इस विरोध प्रदर्शन ने—
👉 हॉकरों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं को एक बार फिर सामने ला दिया है
👉 अब देखने वाली बात होगी कि—
👉 प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है
👉 और क्या प्रभावित लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।

