आसनसोल में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर AIMIM का हमला! दानिश अज़ीज़ ने उठाए बड़े सवाल

आसनसोल (पश्चिम बर्दवान): आसनसोल बाजार क्षेत्र में नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर अब राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम के पश्चिम बर्धमान जिला अध्यक्ष दानिश अज़ीज़ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

🚨 क्या है विवाद की वजह?

👉 नगर निगम ने हाल ही में बाजार क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया
👉 इस दौरान कई हॉकरों और अस्थायी दुकानों को हटा दिया गया

👉 आरोप है कि—
❗ बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के कार्रवाई की गई
❗ पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई
❗ गरीब हॉकरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा

🗣️ दानिश अज़ीज़ का बड़ा बयान

दानिश अज़ीज़ ने कहा—
👉 “यह कार्रवाई मानवीय दृष्टिकोण से बिल्कुल गलत है”
👉 “कानून लागू करना जरूरी है, लेकिन गरीबों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए”

👉 उन्होंने दावा किया—
👉 9 जुलाई को राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने बाजार का दौरा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे
👉 लेकिन कार्रवाई तय समय से पहले ही शुरू कर दी गई

📉 हॉकरों पर पड़ा सीधा असर

👉 इस अभियान में—
✔️ कई हॉकरों का सामान नष्ट हो गया
✔️ छोटे व्यापारियों की पूंजी खत्म हो गई
✔️ कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया

⚖️ प्रशासन पर उठे सवाल

👉 दानिश अज़ीज़ ने आरोप लगाया कि—
👉 कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
👉 प्रभावित लोगों को अपना सामान हटाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया

👉 उन्होंने यह भी कहा—
👉 जिन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उन्हें ही पूरे मामले का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है
👉 जबकि निष्पक्ष जांच जरूरी है

🪧 AIMIM की प्रमुख मांगें

👉 प्रभावित हॉकरों के लिए—
✔️ उचित आर्थिक मुआवजा
✔️ वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था
✔️ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच

📊 बढ़ता राजनीतिक दबाव

👉 इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं
👉 शहर में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है

👉 स्थानीय लोगों का कहना है—
👉 विकास और व्यवस्था जरूरी है, लेकिन मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

✨ निष्कर्ष

आसनसोल का अतिक्रमण हटाओ अभियान—
👉 अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है

👉 एक तरफ शहर को व्यवस्थित करने की जरूरत,
👉 तो दूसरी तरफ गरीब हॉकरों की आजीविका का सवाल

👉 अब सबकी नजर इस पर है कि—
👉 क्या प्रशासन कोई राहत या समाधान देता है
👉 और क्या इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।

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