आसनसोल महावीर स्थान मंदिर में शताब्दी वर्ष का भव्य सम्मान समारोह

आसनसोल में स्थित महावीर स्थान मंदिर में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब महावीर अखाड़ा समिति के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

22 मई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

🎉 शताब्दी वर्ष पर भव्य आयोजन

महावीर स्थान मंदिर सार्वजनीन दुर्गापूजा एवं महावीर अखाड़ा समिति के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस समारोह में पश्चिम वर्धमान जिले के कई नवनिर्वाचित विधायक और प्रमुख नेता शामिल हुए।

👥 मंच पर दिखी नेताओं की बड़ी मौजूदगी

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:

👉 कृष्णेंदु मुखर्जी (आसनसोल उत्तर विधायक)
👉 जितेंद्र तिवारी (पांडेश्वर विधायक)
👉 अरिजीत रॉय (बाराबनी विधायक)
👉 देवतनु भट्टाचार्य (जिला सभापति)
👉 अपूर्व हाजरा (जिला सचिव)
👉 अभय वर्णवाल (जिला कोषाध्यक्ष)
👉 कृष्णा प्रसाद (समाजसेवी)
👉 शंकर चौधरी (समाजसेवी)

🏵️ पारंपरिक तरीके से अतिथियों का सम्मान

समिति की ओर से सभी अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया:

👉 पगड़ी पहनाकर सम्मान
👉 उत्तरीय, स्मृति चिन्ह और कमल पुष्प भेंट
👉 फूलों के गुलदस्ते से अभिनंदन
👉 पारंपरिक अंदाज में झालमुड़ी देकर सत्कार

इस अनोखे सम्मान ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।

🙏 शताब्दी कार्यक्रमों के लिए सहयोग की अपील

समिति की ओर से सभी अतिथियों और जनता से अनुरोध किया गया कि:

👉 शताब्दी वर्ष के सभी कार्यक्रमों में सहयोग दें
👉 सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को सफल बनाएं
👉 परंपरा को आगे बढ़ाने में भागीदारी निभाएं

🤝 विधायकों का भरोसा—पूरा मिलेगा सहयोग

सभी विधायकों और अतिथियों ने:

👉 समिति का आभार व्यक्त किया
👉 हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया
👉 भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को समर्थन देने की बात कही

🌟 सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक

महावीर अखाड़ा समिति का यह 100 वर्ष का सफर:

👉 धार्मिक आस्था का प्रतीक
👉 सामाजिक एकता का उदाहरण
👉 और सांस्कृतिक परंपरा की मजबूत पहचान

🔚 निष्कर्ष

आसनसोल का यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर बन गया है।

👉 शताब्दी वर्ष की शुरुआत
👉 जनप्रतिनिधियों की एकजुटता
👉 और समाज के सहयोग का संदेश

यह कार्यक्रम आने वाले समय में और भी बड़े आयोजनों की नींव रखता नजर आ रहा है, जिससे आसनसोल की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।

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