पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई शुरुआत के बीच आसनसोल से एक भावनात्मक और चर्चित खबर सामने आई है। कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव से पहले किया गया अपना वादा निभाते हुए शपथ ग्रहण के तुरंत बाद बस्तीन बाजार स्थित दुर्गामंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मंदिर में नियमित पूजा शुरू कराने की घोषणा की।
बताया जा रहा है कि पिछले लगभग 14 वर्षों से इस मंदिर में नियमित पूजा बंद थी और मंदिर के कपाट भी बंद पड़े थे। इसको लेकर स्थानीय सनातनी समाज में काफी असंतोष था और लंबे समय से मंदिर को फिर से खोलने की मांग की जा रही थी। चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने लोगों से वादा किया था कि जीतने के बाद वह मंदिर को फिर से खोलवाएंगे और पूजा शुरू कराएंगे।
विधायक पद की शपथ लेने के दूसरे ही दिन कृष्णेंदु मुखर्जी सीधे मंदिर पहुंचे। वहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई और उन्होंने माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और सनातनी समाज के सदस्य मौजूद रहे। मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल बन गया।
कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि “यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का केंद्र है। पिछले 14 वर्षों से यहां पूजा बंद थी, लेकिन अब यह परंपरा फिर से शुरू होगी और प्रतिदिन नियमित पूजा होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि जनता से किया गया वादा उनके लिए सर्वोपरि है और उसे निभाना उनकी जिम्मेदारी है।
समाजसेवी कृष्णा प्रसाद ने विधायक के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जो वादा किया था, उसे पूरा कर दिखाया। उनके अनुसार, सनातनी समाज इस दिन का वर्षों से इंतजार कर रहा था और अब मंदिर खुलने से लोगों में नई ऊर्जा और उत्साह आया है।
वहीं स्थानीय निवासी दिव्यांशु अग्रवाल ने भी खुशी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय किया गया वादा पूरा होना लोगों के विश्वास को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि मंदिर में फिर से पूजा शुरू होने से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कदम केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का भी प्रतीक है। अब हर दिन मंदिर में आरती और पूजा के साथ बस्तीन बाजार क्षेत्र में भक्ति का वातावरण गूंजेगा।
कुल मिलाकर, कृष्णेंदु मुखर्जी का यह कदम राजनीति में वादों को निभाने की मिसाल बनता नजर आ रहा है, जिसने लोगों के बीच विश्वास और उम्मीद दोनों को मजबूत किया है।















