पश्चिम बंगाल में एक बार फिर साइबर अपराध ने सनसनी फैला दी है। 315 करोड़ रुपये के बड़े साइबर फ्रॉड केस में उद्योगपति पवन रुइया की गिरफ्तारी ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। मंगलवार को पुलिस ने उन्हें कोलकाता के बाहरी इलाके न्यू टाउन स्थित एक होटल के पास से गिरफ्तार किया।
🚨 148 फर्जी कंपनियों का जाल
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे मामले में 148 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के जरिए करीब 315 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, जिसे साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ा जा रहा है।
बिधाननगर साइबर अपराध थाने में दर्ज इस केस में आरोप है कि मुखौटा कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाकर ठगी को अंजाम दिया गया।
✈️ दिल्ली एयरपोर्ट से भी गिरफ्तारी
इस मामले में पहले ही एक और आरोपी राहुल वर्मा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया जा चुका है। वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन समय रहते पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल वर्मा को पवन रुइया का करीबी सहयोगी माना जा रहा है और दोनों के बीच वित्तीय लेनदेन के कई सबूत सामने आए हैं।
⚖️ हाई कोर्ट का फैसला बना टर्निंग पॉइंट
गिरफ्तारी से ठीक पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरोपी और उसके परिवार को दी गई अंतरिम सुरक्षा को रद्द कर दिया।
गौरतलब है कि दिसंबर में अदालत ने पवन रुइया, उनके बेटे राघव रुइया और बेटी पल्लवी रुइया को अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन अब यह राहत खत्म हो गई।
📱 व्हाट्सएप और फर्जी निवेश का खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा मामला एक मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए चलाई जा रही फर्जी निवेश योजना से जुड़ा है।
- एक वरिष्ठ नागरिक को अधिक रिटर्न का लालच दिया गया
- उसे व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया
- 2023-24 के दौरान उससे किस्तों में 93 लाख रुपये निवेश कराए गए
बाद में जब पैसा वापस नहीं मिला, तो धोखाधड़ी का मामला सामने आया।
💰 बैंक खातों के जरिए मनी ट्रेल
पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि कथित तौर पर रुइया परिवार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से बड़ी रकम का ट्रांजैक्शन हुआ। इससे मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल को और मजबूती मिली है।
🔍 जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
पुलिस ने यह मामला स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था और अब लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस केस में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
⚠️ साइबर ठगी से सावधान!
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल फर्जी निवेश योजनाएं, खासकर व्हाट्सएप और मोबाइल ऐप्स के जरिए, तेजी से फैल रही हैं।
👉 ऐसे में किसी भी “जल्दी अमीर बनने” वाले ऑफर से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
👉 यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध की गंभीर चेतावनी भी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस घोटाले में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।














