कोलकाता में एक बार फिर महंगाई ने आम लोगों और कारोबारियों को झटका दिया है। घरेलू एलपीजी के बाद अब कमर्शियल कुकिंग गैस के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस बार कीमतों में 218 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है, जिसके बाद 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2208 रुपये हो गई है।
📈 महीने के आखिरी दिन बड़ा झटका
मार्च महीने की शुरुआत में ही कमर्शियल गैस के दाम बढ़े थे, लेकिन महीने के आखिरी दिन फिर इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
1 मार्च को कीमत बढ़कर 1875.50 रुपये हुई थी, यानी 31 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अब सीधे 218 रुपये की छलांग ने बाजार में हलचल मचा दी है।
🔥 घरेलू गैस भी हुई थी महंगी
कमर्शियल गैस के साथ-साथ घरेलू एलपीजी भी महंगाई की मार से बच नहीं सकी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच घरेलू गैस की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत 939 रुपये पहुंच गई।
🌍 क्यों बढ़ रहे हैं गैस के दाम?
तेल कंपनियों के अनुसार, गैस की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर तय की जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से तीन कारक शामिल होते हैं:
- कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत
- अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार का उतार-चढ़ाव
- डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर
इन्हीं कारणों से हर महीने कीमतों में संशोधन किया जाता है।
📊 पिछले कुछ महीनों का ट्रेंड
- अक्टूबर 2025: लगभग 15.50 रुपये की बढ़ोतरी
- नवंबर 2025: केवल 5 रुपये की राहत
- जनवरी 2026: एक झटके में 111 रुपये की बढ़ोतरी
- फरवरी 2026: 49 रुपये का इजाफा
- मार्च 2026: पहले 31 रुपये, अब 218 रुपये की भारी बढ़ोतरी
इस ट्रेंड से साफ है कि नए साल की शुरुआत से ही गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
🍽️ होटल-रेस्टोरेंट पर सीधा असर
कमर्शियल गैस की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उन्हें खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
ग्राहकों को भी चिंता है कि आने वाले दिनों में बाहर खाना और महंगा हो सकता है।
🏛️ सियासत भी गरमाई
चुनाव से पहले गैस की बढ़ती कीमतें अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही हैं। राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। पार्टी का आरोप है कि महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया जा रहा।
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतों में बदलाव जरूरी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
🔍 आगे क्या?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले महीनों में एलपीजी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।
👉 ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या महंगाई का यह दबाव आम जनता और छोटे कारोबारियों की जेब पर और भारी पड़ेगा? या फिर सरकार जल्द कोई राहत देगी?














