फॉर्म-6 पर बवाल! सीईओ ऑफिस के बाहर भिड़ंत, ममता ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासत अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इस बार विवाद का केंद्र बना है फॉर्म-6, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में जबरदस्त घमासान छिड़ गया है। कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर मंगलवार को जो कुछ हुआ, उसने पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर को और गर्म कर दिया।

📌 फॉर्म-6 पर क्यों मचा है बवाल?

सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सीईओ ऑफिस पहुंचकर आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा किए जा रहे हैं। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई।

तृणमूल कांग्रेस का सीधा आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी फॉर्म-6 के जरिए दूसरे राज्यों के लोगों को पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में शामिल करने की साजिश कर रही है। यह आरोप सामने आते ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया।

⚖️ सीईओ का बयान—जांच के बाद ही मान्य होंगे फॉर्म

राज्य के सीईओ मनोज अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके कार्यालय में विभिन्न प्रकार के दस्तावेज आते हैं, जिनमें फॉर्म-6 भी शामिल है। लेकिन किसी भी फॉर्म को बिना जांच के स्वीकार नहीं किया जाता।

उन्होंने यह भी बताया कि नए मतदाताओं को जोड़ने का अंतिम निर्णय सीईओ नहीं, बल्कि संबंधित ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) लेते हैं। साथ ही उन्होंने साफ किया कि तय तारीख के बाद जमा हुए फॉर्म-6 इस चुनाव में मान्य नहीं होंगे।

🗳️ चुनावी तारीखें और नियम

  • पहला चरण मतदान: 23 अप्रैल
  • दूसरा चरण मतदान: 29 अप्रैल
  • नामांकन की अंतिम तिथि:
    • पहला चरण: 6 अप्रैल
    • दूसरा चरण: 9 अप्रैल

सीईओ के अनुसार, केवल निर्धारित तिथि तक जमा फॉर्म-6 ही इस चुनाव के लिए वैध होंगे।

⚠️ सीईओ ऑफिस के बाहर हंगामा

मंगलवार को सीईओ कार्यालय के बाहर हालात अचानक बिगड़ गए। तृणमूल समर्थकों का आरोप था कि एक युवक बैग भरकर फॉर्म-6 जमा करने आया था। उसे रोकने के दौरान धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब मौके पर बीजेपी कार्यकर्ता भी पहुंच गए और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते नारेबाजी, विरोध प्रदर्शन और झड़प शुरू हो गई।

हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस और केंद्रीय बलों ने बैरिकेडिंग कर दोनों पक्षों को अलग किया। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

🔍 दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप

  • तृणमूल कांग्रेस: बीजेपी पर अवैध रूप से फॉर्म-6 जमा करने का आरोप
  • भारतीय जनता पार्टी: अपने कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप

दोनों ही दलों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

📝 ममता बनर्जी का बड़ा आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि गैर-निवासियों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की घटनाएं पहले बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनावों में भी सामने आ चुकी हैं।

चंद्रकोणा की जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा:
“जिनका नाम पहले से हट गया है, उन्हें जोड़ा नहीं जा रहा, लेकिन बाहर के लोगों को लाकर सूची में शामिल किया जा रहा है।”

📱 सोशल मीडिया पर भी गरमाया मुद्दा

अभिषेक बनर्जी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मुद्दे को उठाया और आरोपों को दोहराया। इससे यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र बनने वाला है।

🔥 राजनीतिक विश्लेषण

विशेषज्ञों का मानना है कि फॉर्म-6 विवाद केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, यह विवाद और गहराता जाएगा।

👉 अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और क्या यह विवाद चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है या नहीं।

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