आसनसोल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आसनसोल उत्तर सीट पर भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी समीकरण चर्चा में हैं। समाजसेवी और भाजपा नेता कृष्णा प्रसाद, जो इस सीट से उम्मीदवार बनने की दौड़ में थे, उन्हें टिकट नहीं मिला। हालांकि, इस फैसले के बावजूद उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बरकरार रखते हुए संगठन के लिए काम जारी रखने का ऐलान किया है।
⚡ टिकट नहीं, लेकिन जज़्बा बरकरार
कृष्णा प्रसाद पिछले काफी समय से आसनसोल उत्तर क्षेत्र में सक्रिय रूप से जनसेवा और संगठनात्मक कार्यों में लगे हुए थे।
👉 क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया
👉 सामाजिक कार्यों के जरिए लोगों के बीच पहचान बनाई
👉 पार्टी के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया
इसके बावजूद टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में कुछ निराशा जरूर देखी गई, लेकिन कृष्णा प्रसाद ने साफ कर दिया कि उनके लिए पार्टी और संगठन सर्वोपरि है।
🗣️ बीजेपी जिला अध्यक्ष का बड़ा बयान
इस पूरे मुद्दे पर भाजपा आसनसोल संगठन जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा—
👉 “केवल कृष्णा प्रसाद ही नहीं, कई नेताओं ने टिकट के लिए प्रयास किया था”
👉 “पार्टी सभी को अपनी दावेदारी रखने की अनुमति देती है”
👉 “अंतिम निर्णय संगठन और शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाता है”
🤝 टिकट के बाद एकजुटता का संदेश
देवतनु भट्टाचार्य ने आगे कहा कि—
👉 टिकट घोषित होने के बाद सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर पार्टी की जीत के लिए काम करते हैं
👉 इस बार भी भाजपा एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी
👉 कृष्णा प्रसाद संगठन के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करते रहेंगे
🔥 राजनीतिक संदेश क्या है?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक—
👉 यह घटनाक्रम पार्टी के अंदर अनुशासन और एकजुटता का संकेत देता है
👉 टिकट न मिलने के बावजूद सक्रिय रहना, कार्यकर्ताओं के लिए एक उदाहरण है
👉 इससे पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क और मजबूत हो सकता है
📊 चुनावी समीकरण पर असर
आसनसोल उत्तर सीट इस बार बेहद अहम मानी जा रही है। ऐसे में—
👉 हर नेता और कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है
👉 संगठनात्मक मजबूती चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है
👉 कुल मिलाकर, कृष्णा प्रसाद का यह रुख साफ करता है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर पार्टी हित में काम करना ही उनकी प्राथमिकता है, जो चुनावी माहौल में भाजपा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।














