महाअष्टमी पर कुल्टी में आस्था का सैलाब! 60वें वर्ष में अन्नपूर्णा पूजा बनी आकर्षण

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कुल्टी (आसनसोल): पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल स्थित कुल्टी के रानीतला मोड़ पर इस बार आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। यंग बंगाल एसोसिएशन द्वारा आयोजित श्री श्री अन्नपूर्णा पूजा ने इस वर्ष अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर इतिहास रच दिया है। इस खास मौके पर पूरे इलाके में उत्सव और भक्ति का माहौल चरम पर नजर आया।

🎉 तीन दिवसीय महोत्सव में भक्ति की बयार

रानीतला क्षेत्र में स्थित यह पूजा पंडाल इलाके का प्रमुख आकर्षण माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के दौरान तीन दिवसीय भव्य आयोजन किया गया।

पूरे क्षेत्र में—

  • रंग-बिरंगी रोशनी
  • भक्ति गीतों की गूंज
  • और श्रद्धालुओं की भीड़
    ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया।

🙏 महाअष्टमी पर उमड़ा जनसैलाब

महाअष्टमी के दिन दोपहर करीब 1 बजे जैसे ही पुष्पांजलि का समय हुआ, पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

  • महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग—सभी मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए पहुंचे
  • लंबी कतारों में खड़े होकर भक्तों ने श्रद्धा के साथ अंजलि अर्पित की
  • “जय मां अन्नपूर्णा” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा

🍛 महाप्रसाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

पूजा समिति के अनुसार—

  • तीनों दिन महाप्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है
  • हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है
  • धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है

शाम के समय भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।

🌼 60 वर्षों की अटूट परंपरा

करीब छह दशकों से लगातार आयोजित हो रही यह अन्नपूर्णा पूजा अब कुल्टी की पहचान बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि—
👉 “यह पूजा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की एकता और संस्कृति का प्रतीक है।”

🔥 आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश

इस पूजा के माध्यम से न सिर्फ भक्ति का माहौल बनता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ आकर एकता और भाईचारे का संदेश भी देते हैं।

👉 कुल मिलाकर, कुल्टी के रानीतला मोड़ पर आयोजित श्री श्री अन्नपूर्णा पूजा का 60वां वर्ष एक ऐतिहासिक अवसर बन गया है। यहां उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह साबित करती है कि आस्था और परंपरा की जड़ें समय के साथ और भी मजबूत होती जाती हैं।

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