कोलकाता : राज्य की सियासत में उस समय भूचाल आ गया जब चुनाव आयोग के एक पुराने दस्तावेज़ में बीजेपी की मुहर और चुनाव चिन्ह होने का आरोप सामने आया। इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोलते हुए इसे “थैली से बिल्ली बाहर आना” बताया और आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
⚡ दस्तावेज़ पर बीजेपी की मुहर, विवाद गहराया
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने छह साल पुराने एक दस्तावेज़ को सार्वजनिक किया।
👉 दस्तावेज़ में कथित तौर पर बीजेपी का नाम और चुनाव चिन्ह वाली मुहर दिखाई दी
👉 इसके बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया
👉 चुनाव आयोग ने इसे “क्लेरिकल मिस्टेक” बताया, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा
🗣️ ममता बनर्जी का सीधा सवाल—गलती या साजिश?
उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले ममता बनर्जी ने आयोग को घेरते हुए कहा—
👉 “यह सिर्फ क्लेरिकल मिस्टेक है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा है?”
👉 “पीछे से खेल क्यों खेला जा रहा है, सामने आकर खेलें”
👉 उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया
📱 अभिषेक बनर्जी भी हुए आक्रामक
इस मुद्दे पर तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी ने भी सोशल मीडिया के जरिए चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
👉 उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए
👉 पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज बुलंद की
🌙 आधी रात को मतदाता सूची जारी, नए सवाल
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची (SIR) को आधी रात में जारी किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
👉 “आधी रात को सूची जारी करने की क्या जरूरत थी?”
👉 “क्या इसमें पारदर्शिता की कमी है?”
👉 उन्होंने आरोप लगाया कि यह किसी खास पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो सकती है
🔄 अधिकारियों के तबादले पर भी विवाद
ममता बनर्जी ने हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों को लेकर भी नाराज़गी जताई।
👉 73 रिटर्निंग ऑफिसरों के तबादले पर सवाल उठाए गए
👉 नंदीग्राम के बीडीओ को भवानीपुर लाने पर भी आपत्ति
👉 उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से बिना सलाह लिए ये फैसले किए गए
🤝 सभी दलों से एकजुट होने की अपील
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा—
👉 “बाएं-दाएं भूल जाएं, लोकतंत्र बचाने के लिए साथ आएं”
👉 “मेरे साथ नहीं, जनता के साथ खड़े रहें”
🔴 विपक्ष की प्रतिक्रिया
सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा—
👉 “केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता जरूरी है, लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लड़ाई होगी”
👉 उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई बीजेपी और तृणमूल दोनों के खिलाफ है
⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
ममता बनर्जी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी हैं।
👉 उन्होंने दावा किया कि सूची में शामिल कई नाम उनके कानूनी प्रयासों का परिणाम हैं
👉 साथ ही चेतावनी दी कि यही SIR भविष्य में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है
📌 निष्कर्ष:
चुनाव आयोग, बीजेपी और तृणमूल के बीच छिड़ी यह सियासी जंग आने वाले चुनाव को और भी दिलचस्प बना सकती है।
👉 अब देखना होगा कि यह विवाद चुनावी परिणामों पर कितना असर डालता है और क्या आयोग इन आरोपों पर कोई ठोस कदम उठाता है।














