दूसरी मतदाता सूची जारी, लेकिन आंकड़े गायब! चुनाव आयोग पर उठे सवाल

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गई दूसरी अतिरिक्त मतदाता सूची ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

👉 सोमवार देर रात 12 बजे से कुछ मिनट पहले यह सूची प्रकाशित की गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—आखिर कितने नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए?

⚠️ आंकड़ों पर सस्पेंस, आयोग की चुप्पी

हालांकि आयोग ने अतिरिक्त सूची जारी कर दी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुल कितने मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हुए और कितनों को बाहर किया गया।

👉 इससे पहले 28 फरवरी को जारी पहली अंतिम सूची में 5 लाख 46 हजार 53 नाम हटाए गए थे, और कुल मिलाकर 63 लाख 66 हजार 952 नाम सूची से बाहर हो चुके थे।

📊 बूथवार दो हिस्सों में जारी हुई सूची

सोमवार को जारी अतिरिक्त सूची को दो भागों में प्रकाशित किया गया है—
👉 एक सूची में नए जोड़े गए मतदाताओं के नाम
👉 दूसरी सूची में हटाए गए नाम शामिल हैं

मतदाता आयोग की वेबसाइट से अपनी जानकारी देख सकते हैं, लेकिन…

💻 तकनीकी दिक्कतों से बढ़ी परेशानी

👉 कई बूथों की सूची डाउनलोड नहीं हो पा रही है
👉 EPIC नंबर से भी नाम खोजने में दिक्कत आ रही है

इससे आम मतदाताओं में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही है।

🕒 जारी करने के समय पर भी सवाल

रविवार को आयोग ने कहा था कि सूची शाम तक जारी कर दी जाएगी, लेकिन अंततः इसे रात 12 बजे से ठीक पहले जारी किया गया।

👉 राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी रात 9 बजे के आसपास सूची आने की बात कही थी, जिससे समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

📉 करोड़ों मतदाताओं पर असर

विशेष गहन संशोधन (SIR) शुरू होने से पहले राज्य में कुल मतदाता संख्या 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 थी।

👉 ड्राफ्ट सूची में 58 लाख 20 हजार 899 नाम हटाए गए
👉 पहली अंतिम सूची के बाद यह संख्या घटकर 7 करोड़ 4 लाख 59 हजार 284 रह गई

अब नई सूची के बाद क्या बदलाव हुआ है, यह अब भी साफ नहीं है।

⚖️ नाम कटने पर क्या करें?

अगर किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया गया है, तो वह ट्राइब्यूनल में अपील कर सकता है।

👉 कोलकाता हाई कोर्ट ने 23 जिलों के लिए 19 ट्राइब्यूनल गठित किए हैं
👉 अपील ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से की जा सकती है

🔍 राजनीतिक हलचल तेज

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों में भी हलचल तेज हो गई है।
👉 विपक्ष जहां पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग प्रक्रिया को सही बता रहा है।

📌 निष्कर्ष:

मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे अहम कड़ी होती है, लेकिन जब उसी में पारदर्शिता पर सवाल उठने लगें, तो चिंता बढ़ना लाजिमी है।

👉 अब सभी की नजर इस बात पर है कि निर्वाचन आयोग कब तक स्पष्ट आंकड़े जारी करेगा और मतदाताओं की शंकाओं को दूर करेगा।

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