आसनसोल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। राज्य के कई हिस्सों में विरोध के सुर तेज हो रहे हैं, वहीं आसनसोल में यह मामला अब राजनीतिक हलचल का बड़ा कारण बन गया है।
आसनसोल नगर निगम के 87 नंबर वार्ड के पार्षद और राज्य तृणमूल कमेटी के सदस्य अशोक रूद्र ने टिकट न मिलने पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की।
⚠️ “सालों की मेहनत का क्या मिला?”—अशोक रूद्र
अशोक रूद्र ने कहा कि वह कई वर्षों से पार्टी के लिए लगातार काम कर रहे हैं, जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया है और आम जनता के मुद्दों को उठाया है। इसके बावजूद उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया—
👉 “जब मैं लगातार जनता के लिए संघर्ष कर रहा हूं, तो मुझे ही क्यों दरकिनार किया जा रहा है?”
🏭 रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर रहा फोकस
अशोक रूद्र ने दावा किया कि उन्होंने इस्को स्टील प्लांट में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए लगातार आवाज उठाई। इसके साथ ही क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं—जैसे सड़क, पानी और रोजगार—को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई।
लेकिन टिकट वितरण में इन सब प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे वह बेहद आहत हैं।
🧾 “पहले नाम था, फिर हटा दिया गया”
सबसे बड़ा दावा करते हुए अशोक रूद्र ने कहा कि आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट के उम्मीदवारों की शुरुआती सूची में उनका नाम सबसे ऊपर था, लेकिन बाद में अचानक उसे हटा दिया गया।
उन्होंने कहा कि उन्हें आज तक यह समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा क्यों किया गया।
🔥 बड़े फैसले के संकेत, बढ़ेगी सियासी गर्मी
अपने बयान के अंत में अशोक रूद्र ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मुद्दे पर कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। उनके इस बयान के बाद आसनसोल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो चुनाव से पहले तृणमूल को आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
🗣️ भाजपा का तंज—“यह बंटवारे का मामला”
वहीं, इस पूरे विवाद पर भाजपा नेता और आसनसोल उत्तर से उम्मीदवार कृष्णादु मुखर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि यह मामला “भाग बंटवारे” जैसा लग रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह तृणमूल का आंतरिक मामला है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं है।
📊 निष्कर्ष
टिकट बंटवारे के बाद तृणमूल कांग्रेस में उभरती यह नाराजगी साफ संकेत देती है कि चुनावी मुकाबले से पहले पार्टी को अंदरूनी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है।
👉 अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अशोक रूद्र आगे क्या फैसला लेते हैं—और इसका असर आसनसोल की राजनीति पर कितना पड़ता है।














